यूपी: फर्जी नियुक्ति पत्र से प्रदेश में 144 प्राइमरी शिक्षक कर रहे नौकरी, जानिए कैसे

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लखनऊ। प्रदेश के कई जिलों में 144 ऐसे सहायक अध्यापक नौकरी कर रहे हैं। जिन्हें विभाग ने नहीं जालसाजों ने भर्ती करा दिया। यही नहीं परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय की मिलीभगत से इनका सत्यापन भी करवा डाला। एसटीएफ ने शुक्रवार को लखनऊ में इस गैंग के मास्टरमाइंड समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया। एसपी …

लखनऊ। प्रदेश के कई जिलों में 144 ऐसे सहायक अध्यापक नौकरी कर रहे हैं। जिन्हें विभाग ने नहीं जालसाजों ने भर्ती करा दिया। यही नहीं परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय की मिलीभगत से इनका सत्यापन भी करवा डाला। एसटीएफ ने शुक्रवार को लखनऊ में इस गैंग के मास्टरमाइंड समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया। एसपी एसटीएफ हेमराज मीणा ने बताया कि यह गैंग पिकप भवन के सामने सुबह आठ बजे पकड़ा गया।

गैंग का मुखिया शिकोहाबाद निवासी रामनिवास उर्फ राम भइया पुत्र ताले सिंह है। जो फिरोजबाद में ही जूनियर हाईस्कूल का फर्जी शिक्षक है। उसके साथ बिहार के गया जिला निवासी संजय सिंह पुत्र शिवनरायन सिंह भी पकड़ा गया। जो कि फिलहाल गाजियाबाद में डाटा साफ्ट कम्प्यूटर सर्विसेज का प्रोडक्शन मैनेजर है। तीसरा साथी आगरा निवासी रविंद्र कुमार उर्फ रवि पुत्र बहादुर सिंह है जो आगरा में ही फर्जी प्राथमिक शिक्षक है।

एसपी ने बताया कि यह गैंग फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर शिक्षकों आदि की नियुक्ति कराते थे। यह लोग भारी रकम लेकर टीजीटी, पीजीटी व टीईटी की परीक्षाएं भी पास कराते थे। वर्ष 2016 में हुयी 15000 प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती में इन्होंने अपने कुछ कैंडीडेट भर्ती कराने का प्रयास किया, लेकिन सब पकड़े गए। तब इन्होंने वर्ष 2017 में 68500 और 2018 में 69000 शिक्षक भर्ती में उन लोगों के नाम छांटे, जिन्होंने दोनों भर्तियां पास की थीं और एक में ही ज्वाइनिंग ली थी। इन्हीं खाली पदों पर जालसाजों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अपने कैंडीडेट भर्ती करा दिए और उनसे करोड़ों रुपये वसूल किए।

इन जिलों में तैनात हैं भर्ती शिक्षक

हरदोई में नौ इटावा मे 10, अमेठी में पांच, गोण्डा में एक, बलरामपुर में एक औरैया में एक जालौन में नौ, श्रावस्ती में आठ तथा सीतापुर, हाथरस व प्रयागराज जनपदों में लगभग 100

बाकायदा सत्यापन भी कराया

नियुक्ति वाले जिलों से जब परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय से सत्यापन कराया गया तो रामनिवास ने यहां के लिपिक नरेन्द्र कन्नौजिया से मिलकर सत्यापन करा दिया। जिसके बदले नरेन्द्र को प्रति कैंडिडेट 50 हजार रुपये नकद व खाते में भेजे गए। इसमें कार्यालय के अन्य कर्मचारियों ने भी साथ दिया।

26 कैंडीडेट टीजीटी पास कराने की थी तैयारी

वर्ष 2021 मे टीजीटी परीक्षा में सख्ती से इस गैंग की नहीं चली तो इन्हें पास कराने की जिम्मेदारी डाटा साफ्ट कम्प्यूटर सर्विसेज दिल्ली के मैनेजर संजय सिंह ने ली। संजय ने कहा कि रिजल्ट बनाने वाली कम्पनी से उसके सम्बन्ध हैं। ओएमआर शीट खाली भी होगी तो वह पास करा देगा। इसमें 26 कैंडीडेट पास कराने के लिए सात लाख रुपया प्रति कैंडीडेट रकम तय हुई। इसी सौदे के तहत यह गैंग इन्फोलिंक कम्पनी के किसी अधिकारी से मिलने आया था।

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