बरेली: छोटे हाथी को बना लिया खाने का स्टाल, लाइसेंस का अता-पता नहीं
बरेली, अमृत विचार। शहर में चार पहिया वाहनों पर खान-पान का सामान बेचने वालों की बाढ़ सी आ गई है। दिन भर सड़क किनारे रसोईनुमा वाहन खड़ा कर लोगों को खाने-पीने की चीजें परोसी जाती हैं। चाट-पकौड़े से लेकर आइसक्रीम और फालूदा खाने के लिए बाकयदा बाजार सजता है। हैरानी की बात यह है कि …
बरेली, अमृत विचार। शहर में चार पहिया वाहनों पर खान-पान का सामान बेचने वालों की बाढ़ सी आ गई है। दिन भर सड़क किनारे रसोईनुमा वाहन खड़ा कर लोगों को खाने-पीने की चीजें परोसी जाती हैं। चाट-पकौड़े से लेकर आइसक्रीम और फालूदा खाने के लिए बाकयदा बाजार सजता है। हैरानी की बात यह है कि खाद्य पदार्थों की बिक्री का यह काम अधिकतर जगह बिना किसी फूड लाइसेंस के किया जा रहा है। दूसरी सबसे बड़ी बात जिन चौपहिया वाहनों को रसोईघर में तब्दील किया गया है उनको मॉडीफाई करने की अनुमति परिवहन विभाग से ली गई या नहीं, इसका जवाब भी स्टाल लगाने वालों के पास नहीं है।
बता दें कि एक तरफ संक्रमण काल में खान-पान को लेकर डाक्टरों द्वारा सावधानी बरतने की बात कही गई तो दूसरी तरफ शहर में वाहनों को रसोईघर में तब्दील कर एक अलग ही व्यापार शुरू कर दिया गया। इनमें से अधिकतर के पास न तो खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग का लाइसेंस है और न ही कोई रजिस्ट्रेशन।
शील चौराहा, सेलेक्शन प्वाइंट, सिविल लाइंस जैसे इलाकों में ये वाहन खड़े होते हैं। जहां लोग चटखारे लेकर बादाम शेक, फालूदा, लस्सी, अंजीर शेक, फ्रूट सलाद, काजू शेक जैसे खाद्य पदार्थों का जमकर सेवन करते हैं। इनके वाहनों पर न तो फूड लाइसेंस का नंबर लिखा होता है और न ही विभाग द्वारा जारी किया गया रजिस्ट्रेशन नंबर।
शनिवार को जब जांच-पड़ताल की गई तो सिविल लाइंस में छोटे हाथी पर आइसक्रीम और फालूदा बेच रहे व्यक्ति ने बताया कि वह तो केवल मजदूरी करता है। उसका सेठ राजस्थान का है। फूड लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन को लेकर भी व्यक्ति ने खुद को अंजान बताया। वहीं सेलेक्शन प्वाइंट के पास छोटा हाथी पर खाद्य वस्तुएं बेचने वाले व्यक्ति ने बताया उसने लाइसेंस ले रखा है। दूसरी तरफ विभाग के अधिकारियों द्वारा आए दिन औचक निरीक्षण किए जाते हैं। खाने-पीने की वस्तुओं की क्वालिटी चेक की जाती है मगर चौपहिया वाहनों को फूड स्टाल बनाने वाले अक्सर टीमों के आते ही खिसक लेते हैं।
बिना अनुमति के किया वाहनों को माडीफाई
शहर में दर्जनों वाहन ऐसे घूम रहे हैं, जिनको माडीफाई कर खाने-पीने के स्टाल में तब्दील कर लिया गया है। इन वाहनों को माडीफाई करने के लिए अनुमति लेनी पड़ती है। छोटे हाथी को फूड स्टाल में तब्दील करने वाले बताते हैं कि यह हैदराबाद से माडीफाई होकर आता है। इन वाहनों को माडीफाई कराने के लिए अनुमति ली गई या नहीं, इसको लेकर भी गोल-मोल जवाब दिया जाता है। एआरटीओ प्रशासन मनोज सिंह ने बताया कि इस प्रकार का मामला संज्ञान में नहीं आया है। अगर कोई बिना अनुमति के वाहनों को रसोईघर में तब्दील कर रहा है तो अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
जो भी बिना लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन के खाने-पीने की वस्तुएं बेच रहा है, उसको तुरंत अपना रजिस्ट्रेशन कराना चाहिए। फिर चाहे वह वाहनों पर खाद्य पदार्थ बेच रहे हैं या फिर सड़क किनारे स्टाल लगाकर। बिना किसी अनुमति के खाद्य पदार्थ बेचने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। -धर्मराज मिश्रा, जिला अभिहित अधिकारी
