अयोध्या: मठ-मंदिरों की संपत्ति व गद्दी की कब्जेदारी को लेकर रामनगरी पर भी लगा है दाग
अयोध्या। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध परिस्थितियों में प्रयागराज में हुई मौत से अयोध्या स्तब्ध जरूर है। लेकिन मठ मंदिरों की संपत्ति और उस पर कब्जेदारी को लेकर राम की नगरी अयोध्या भी कई बार दागदार हुई है। यहां संपत्ति और महंती विवाद में हत्याएं तक हुई हैं। ऐसे ही तमाम …
अयोध्या। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध परिस्थितियों में प्रयागराज में हुई मौत से अयोध्या स्तब्ध जरूर है। लेकिन मठ मंदिरों की संपत्ति और उस पर कब्जेदारी को लेकर राम की नगरी अयोध्या भी कई बार दागदार हुई है। यहां संपत्ति और महंती विवाद में हत्याएं तक हुई हैं। ऐसे ही तमाम विवादों के चलते यहां के कई प्रमुख संत महंतों में खौफ ऐसा रहता है कि उन्होंने बाकायदा लाइसेंसी असलहे रखे हैं। तमाम साधु हैं जो कंठी के साथ कारतूस पर भी हाथ फेरते हैं।
एक तरफ जहां मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पावन नगरी आस्था और आध्यात्म के चलते पूरी दुनिया में जानी जाती है, वहीं इस प्राचीन नगरी के मंदिरों में महंती और संपत्ति के विवाद को लेकर खून-खराबे का भी लंबा इतिहास रहा है। वर्तमान से करीब 45 वर्ष पूर्व अयोध्या की बेहद प्रसिद्ध छावनी के महंत राम प्रताप दास की हत्या के साथ जो एक सिलसिला शुरु हुआ उसने थमने का नाम नहीं लिया और 90 के दशक के ख़त्म होने तक करीब आधा दर्जन संतों की हत्या का सिलसिला इस पौराणिक नगरी के इतिहास के पन्नो में जुड़ गया। महंत राम प्रताप दास की हत्या के बाद इसी मंदिर के एक अन्य महंत प्रेम नारायण दास की भी हत्या कर दी गई।
जिसके बाद सनातन मंदिर के महंत मोहनदास की गोली मारकर हत्या और उसके बाद महंत मोहन दास के भाई राम कृष्ण दास की भी करंट लगने से संदिग्ध हालत में हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए थे। खूनी संघर्ष की कड़ी में मंदिर पर अधिपत्य जमाने की कोशिश में साधु वेश धारियों ने हनुमत धाम के महंत रामदेव शरण पर बम से हमला कर दिया और उनकी हत्या कर दी। जिसके बाद सन 1991 में जानकी घाट बड़ा स्थान के महंत की उनके ही कमरे में उसी तरह गला घोटकर हत्या कर दी गई। लगातार हो रही खूनी संघर्ष की वारदातों में सन 1995 में हनुमानगढ़ी के महंत रामाज्ञा दास पर जानलेवा हमला हुआ और एक बार फिर से साधु की साधुता पर सवाल उठे।
नब्बे के दशक में अयोध्या के दबंग महंत के रूप में जाने जाने वाले महंत राम कृपाल दास की गोली मारकर हत्या कर दी गई। राम कृपाल दास की हत्या हो जाएगी इसका किसी को अंदाजा नहीं था। खूनी वारदातों की कड़ी में सन 1999 में विद्या कुंड में ही स्थित बड़ा स्थान के महंत राम कृपाल दास की भी संपत्ति के ही विवाद में हत्या कर दी गई थी। इसके बाद बीते दो दशक में भी कई संतों की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई सवाल उठाए।
करीब नौ वर्ष पूर्व वासुदेव घाट के रहने वाले महंत अयोध्या दास की हत्या हो या विकलांग संत लाल दास की हत्या इन सभी घटनाओं के पीछे कहीं ना कहीं मंदिरों की अकूत संपत्ति पर कब्जेदारी का विवाद जुड़ा रहा। इसी कड़ी में 23/24 अगस्त 2018 की रात अयोध्या के विद्या कुंड क्षेत्र स्थित विद्या माता मंदिर में महंती के दावेदार संत रामचरण दास की गला घोंटकर हत्या कर दी गई और उनकी लाश को कमरे में तखत के नीचे छुपा दिया गया। उस मामले में उसी मन्दिर के एक साधु परमात्मा दास को गिरफ्तार किया गया था।
दरअसल राम की नगरी अयोध्या को मंदिरों का शहर भी कहा जाता है | जिसकी बड़ी वजह यह है की अयोध्या के 5 कोस की परिधि में छोटे बड़े मिलाकर तकरीबन 6000 मंदिर हैं। जहां पर भगवान राम सीता के अलावा भगवान शिव, हनुमान, भगवान विष्णु , मां दुर्गा सहित अन्य देवी देवताओं के मंदिर मौजूद हैं। इन मंदिरों में कुछ मंदिर तो ऐसे भी हैं जिनकी प्रसिद्धि विश्व स्तर पर है। यहां पर देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं का आवागमन लगा रहता है। वर्ष में पड़ने वाले तीन बड़े मेले में आने वाले श्रद्धालु इन मंदिरों में दर्शन और पूजन करते हैं ऐसे में बड़ी मात्रा में चढ़ावा भी चढ़ता है।
जिसके कारण इन मंदिरों में अकूत संपत्ति भी मौजूद है। यही वजह है कि इस संपत्ति पर कब्जेदारी को लेकर अक्सर मंदिर के महंत और उनके शिष्यों में विवाद उत्पन्न हो जाता है | यह विवाद कई बार खौफनाक रूप लेकर खूनी वारदातों में बदल जाता है। मौजूदा समय अयोध्या कोतवाली से अधिक थाना राम जन्मभूमि क्षेत्र में स्थित मठ मंदिरों के संत महंतो के पास लाइसेंसी असलहे हैं। वास्तव में इन करीब 70 से अधिक संत महात्माओं ने आत्म रक्षार्थ लाइसेंसी असलहे रखे हैं।
