बरेली: बंदरों के आतंक की दहशत में कई मोहल्ले, वन विभाग खामोश
मोहित कुमार सिंह, अमृत विचार, बरेली। शहर में बंदरों का खौफ लोगों के दिलों में लगातार बढ़ता ही जा रहा है। आए दिन हो रहे बंदरों के हमले से लोगों में डर बना हुआ है। शहर की कई कालोनियों में बंदरो के आतंक से स्थानीय निवासी व राहगीर परेशान हैं। वहीं वन विभाग और नगर …
मोहित कुमार सिंह, अमृत विचार, बरेली। शहर में बंदरों का खौफ लोगों के दिलों में लगातार बढ़ता ही जा रहा है। आए दिन हो रहे बंदरों के हमले से लोगों में डर बना हुआ है। शहर की कई कालोनियों में बंदरो के आतंक से स्थानीय निवासी व राहगीर परेशान हैं। वहीं वन विभाग और नगर निगम की टीमें खामोश बैठे तमाशा देख रही हैं।
शहर में आवारा कुत्तों के साथ-साथ अब बंदरों का आतंक भी बढ़ता जा रहा है। शहर के ज्यादातर इलाके ऐसे हैं जहां के स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी समस्या घरों में चोरी की नहीं बल्कि कुत्तों व बंदरों का आतंक है। सोमवार को एक रिटायर्ड फौजी पर भी बंदरों ने हमला कर दिया था। किसी तरह स्थानीय लोगों ने बंदरों को भगा कर फौजी की जान बचाई थी।
वहीं लगातार बढ़ते कुत्तों व बंदरों के हमले से छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए सबसे ज़्यादा खतरा पैदा कर रहे हैं। जिसके चलते लोगों में डर पैदा होता जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ वन विभाग व नगर-निगम के अधिकारी खामोशी से बैठकर तमाशा देख रहे हैं। जिसकी वजह से लोगों में जान के खतरे के साथ-साथ गुस्सा भी दिखाई देने लगा है। राजेन्द्र नगर, पीडब्लूडी कालोनी, इज्जतनगर रेलवे कालोनी, सिकलापुर, कोहाड़ापीर, डेलापीर, मढीनाथ, संजय नगर, नकटिया जैसे इलाकों में बंदरों के झुण्ड बैठे नजर आते हैं।
सुबह होते ही बंदरों का झुण्ड आ जाता है और फिर दिनभर उधम मचाते रहते हैं। घर के आंगन में कपड़े सुखाते हैं लेकिन वो उसको फाड़ देते हैं। ऐसे में घर में ही कैद रहना पड़ता है। -राजवती, पीडब्ल्यूडी कॉलोनी
छत पर बैठे दोस्तों के साथ चाय पी रहे थे कि अचानक दो चार बंदर आ गये और हम लोगों पर दौड़ पड़े। किसी तरह जान बचाकर नीचे भागना पड़ा। -अभिनव शील, संजय नगर
बंदरो के दिन पर दिन हो रहे हमलो के बारे में क्षेत्र पार्षद व निगम अधिकारियों को कई बार अवगत कराया लेकिन एक बार भी उन्होंने कालोनी की सुध नही ली। ऐसे में मजबूरी मे बचते बचाते हुए घर मे निकलना पड़ता है। -राजेंद्र यादव, पीडब्ल्यूडी कॉलोनी
चार पहिया गाड़ी की छत पर बंदरो का झुंड बैठा था। जब गाड़ी निकालने के गेट खोला तभी सभी बंदर खूंखार हो गये। किसी तरह अपनी जान बचाई। -उत्कर्ष सक्सेना, राजेंद्र नगर
