सफाई चेन की प्रमुख कड़ी गिद्धों का बरेली मंडल से मिट गया नामों-निशां
मोनिस खान, अमृत विचार, बरेली। एक जमाना था जब आम तौर पर गिद्ध देखने को मिल जाते थे। दो दशक पहले तक जिले के कई इलाकों में गिद्धों का जमावड़ा हुआ करता था। मगर मौजूदा वक्त में गिद्ध केवल बरेली ही नहीं बल्कि पूरे वृत्त के लिए दुर्लभ पक्षी बन गए हैं। जानकर हैरानी होती …
मोनिस खान, अमृत विचार, बरेली। एक जमाना था जब आम तौर पर गिद्ध देखने को मिल जाते थे। दो दशक पहले तक जिले के कई इलाकों में गिद्धों का जमावड़ा हुआ करता था। मगर मौजूदा वक्त में गिद्ध केवल बरेली ही नहीं बल्कि पूरे वृत्त के लिए दुर्लभ पक्षी बन गए हैं। जानकर हैरानी होती है कि किसी समय घरों की छतों से लेकर सड़क किनारे तक बैठे मिलने वाले गिद्धों की संख्या जिले में शून्य है।
बरेली के अलावा वन विभाग की गणना के मुताबिक बदायूं और शाहजहांपुर में भी कोई गिद्ध नहीं है। सफाई चेन का प्रमुख अंग कहे जाने वाले गिद्धों के विलुप्तीकरण का कारण भी बेहद दर्दनाक है। माना जाता है कि पशुओं को दी जाने वाली डाइक्लोफिनेक नाम की दवा के कारण गिद्ध विलुप्त हुए।
जानकार बताते हैं कि जिन पशुओं को यह दवा दी गई, किसी कारण उनकी मौत के बाद उसका मांस खाने से गिद्धों की मौत हुई। एक तरफ डाइक्लोफिनेक का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा था तो दूसरी तरफ फूड चेन प्रक्रिया के चलते गिद्ध मरने वाले इन पशुओं का सेवन कर रहे थे।
इस दवा के दुष्प्रभाव से गिद्धों की संख्या में आ रही कमी के कारण कई जगह इसको प्रतिबंधित किया गया। डाइक्लोफिनेक का सेवन करने वाले पशुओं का मांस खाने से गिद्धों की किडनियां फेल हो जाती हैं। इनकी विलुप्तीकरण का दूसरा बड़ा कारण आए दिन कम होता वन क्षेत्र और भारी संख्या में पेड़ों का काटा जाना है।
गिद्धों का सबसे पसंदीदा आवास सेमल के पेड़ होते हैं। इसके कटान के चलते गिद्धों का प्राकृतिक आवास छिन गया। पर्यावरणविदों और पक्षी प्रेमियों का मानना है कि गिद्धों और दूसरे परिंदों को बचाने के लिए पेड़ों को बचाया जाना बेहद जरूरी है। पेड़ काटे जाने से भारी संख्या में गिद्धों ने विस्थापन भी किया है।
2018 के बाद नहीं हुई गिद्धों की गणना
हैरानी की बात यह है कि वन विभाग ने भी गिद्धों के संरक्षण की तरफ ध्यान नहीं दिया। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2018 के बाद से इनकी गणना ही नहीं की गई है। कुछ साल पहले तक आजम नगर, ठिरिया, शाहदाना जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में गिद्ध देखने को मिलते थे।
रूहेलखंड जोन में गिद्धों की संख्या
- बरेली-0
- बदायूं-0
- शाहजहांपुर-0
- पीलीभीत टाइगर रिजर्व-226
- मुरादाबाद-0
- अमरोहा-0
- रामपुर-0
- संभल-0
- बिजनौर-132
- नजीबाबाद-0
कुल-358
गिद्धों के अंडों का छिलका पतला हुआ है। इसके अलावा केमिकल पैसीसाइड उनके विलुप्तीकरण की बड़ी वजह है। विभाग की तरफ से समय-समय पर इनकी गणना कराई जाती है। हालांकि 2018 से यह नहीं हो पाई है। -ललित कुमार वर्मा, मुख्य वन संरक्षक
डाइक्लोफिनेक दवा का सेवन करने वाले पशुओं का मांस खाने से पूर्व में गिद्धों की मौतें हुईं। इसके बाद गिद्ध विलुप्त होते चले गए। इसके अलावा पेड़ काटे जाने से भी गिद्धों ने विस्थापन किया है। -राजेंद्र सिंह, एसो. प्रोफेसर, जंतु विज्ञान
