बरेली: रुहेलखंड में राजकीय पक्षी सारस बढ़ा रहा कुनबा
बरेली, अमृत विचार। प्रदेश सरकार ने राजकीय पक्षी सारस के संरक्षण के निर्देश वन विभाग को दिए थे, जिसका असर अब दिखने लगा है। सारस बरेली जिले और रुहेलखंड जोन में कुनबा बढ़ा रहा है। साल 2019 में हुई शीतकालीन गणना में सारसों की संख्या रुहेलखंड जोन में 2121 थी जो इस साल ग्रीष्म कालीन …
बरेली, अमृत विचार। प्रदेश सरकार ने राजकीय पक्षी सारस के संरक्षण के निर्देश वन विभाग को दिए थे, जिसका असर अब दिखने लगा है। सारस बरेली जिले और रुहेलखंड जोन में कुनबा बढ़ा रहा है। साल 2019 में हुई शीतकालीन गणना में सारसों की संख्या रुहेलखंड जोन में 2121 थी जो इस साल ग्रीष्म कालीन गणना में 2320 हो गई है। इनमें 1835 वयस्क और 485 सारसों के बच्चे शामिल हैं।
साल 2010 में पहली बार सारसों की गणना कराई गई थी। बीते सालों में सारस का कुनबा बरेली के तराई इलाकों में बढ़ा है। बरेली की बात करें तो इस साल हुई ग्रीष्मकालीन गणना के मुताबिक जिले में 293 वयस्क और 33 बच्चे मिलाकर कुल 326 सारस हैं। जबकि, साल 2019 की शीतकालीन गणना के मुताबिक 229 वयस्क और 16 बच्चे मिलाकर 245 सारस थे।
यानी दो साल में 81 सारस बढ़ गए। बता दें कि साल में दो बार इनके संरक्षण के लिए गणना होती है। प्रदेश में सारस संरक्षण समिति का भी गठन किया गया है। यह समिति पानी से तर रहने वाले स्थलों के विकास और संरक्षण के साथ सारस संख्या में वृद्धि के सभी कारकों में मदद करता है।
सारस इस तरह करते हैं वातावरण को सुरक्षित
सारस अधिकतर नम इलाकों और खेतों में रहते हैं। पानी में पैदा होने वाली वनस्पति की जड़ खाते हैं। मेढ़क, मछली, छिपकली, सांप, घोंघा और फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़े-मकौड़े भी इनका भोजन हैं। फसलों के दानों को भी यह चुगते हैं। सारस की उपस्थिति से फसल कीटों से सुरक्षित रहती है। इससे वातावरण भी सुरक्षित और संरक्षित रहता है।
विभाग द्वारा सारस के संरक्षण के लिए गणना कराई जाती है। हमारी टीमें इनकी निगरानी भी कर रही हैं। यही वजह है कि सारसों की संख्या बढ़ रही है। -ललित कुमार वर्मा, मुख्य वन संरक्षक
