बरेली: अध्यक्ष बनने की ‘चाहत’ में गुटों में बंटते चले गए व्यापारी
महिपाल गंगवार, अमृत विचार, बरेली। 1974 की बात करें तो बरेली में सिर्फ एक ही व्यापारिक संगठन कार्यरत था, वो है उप्र उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल। इसकी स्थापना लाला विशंभर दयाल अग्रवाल और पंडित श्याम बिहारी मिश्रा ने प्रदेश स्तर पर की थी। उन्होंने व्यापारियों को एकजुट करने के लिए एक मंच तैयार किया था। …
महिपाल गंगवार, अमृत विचार, बरेली। 1974 की बात करें तो बरेली में सिर्फ एक ही व्यापारिक संगठन कार्यरत था, वो है उप्र उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल। इसकी स्थापना लाला विशंभर दयाल अग्रवाल और पंडित श्याम बिहारी मिश्रा ने प्रदेश स्तर पर की थी। उन्होंने व्यापारियों को एकजुट करने के लिए एक मंच तैयार किया था। जिला मुख्यालय स्तर पर इसकी इकाईयां गठित की थीं। बरेली में इसकी इकाई गठित हुई। इसके बाद व्यापारिक संगठनों की बाढ़ आ गयी। व्यापारियों के बड़े समूह का नेतृत्व करने वाले पदाधिकारियों से नाखुश होकर व्यापारियों ने धीरे-धीरे अपने संगठन बना लिये और अध्यक्ष बन गए।
अध्यक्ष बनने की चाहत ने ही बरेली में व्यापारिक संगठनों की संख्या बढ़ा दी है। अब उप्र उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल से प्रतिनिधि शब्द हट चुका है। इसे उप्र उद्योग व्यापार मंडल से जाना जाता है। यह ऐसा संगठन है जिससे करीब ढाई करोड़ व्यापारी जुड़े हैं। बदलते परिवेश में जब सरकारें बदलती गईं तो नेताओं के दखल ने व्यापारियों को गुटों में बदल दिया। आज प्रदेश में 67 से अधिक व्यापारिक संगठन हैं। बरेली में ही एक दर्जन से अधिक व्यापारिक संगठन हैं।
वर्तमान स्थिति की बात करें तो जिस तरह से राजनीतिक दलों की संख्या बढ़ रही है, उसी तरह से नेता बनने वाले व्यापारी संगठनों को बना रहे हैं। आखिर व्यापारियों के हितों की बात करने वाले व्यापारी आज अपने हितों की तरफ क्यों झुकते जा रहे हैं, जब इस संबंध में पुराने व्यापारियों और खुद का संगठन खड़ा करने वालों से बातचीत की गई तो सभी ने अलग-अलग तर्क दिए। लेकिन आवश्यकता पड़ने पर एकजुटता की बात कही। बुजुर्ग व्यापारियों ने कहा कि व्यापारियों के हितों के नाम पर संगठन के पदाधिकारी अपने हित साध रहे हैं। तो किसी ने सत्ता का सुख पाने को व्यापारियों का ही शोषण करने की बात कही।
कुछ व्यापारी नेताओं की महत्वकांक्षाओं और वर्तमान में व्यापारियों की ताकत ने राजनीतिक दलों को एहसास करा दिया कि बगैर उनकी साठगांठ से सत्ता पर वह काबिज नहीं हो सकते। एक वजह यह भी है जब परिवार बड़ा होता है तो सबके व्यापार और मकान अलग होते हैं। -विशाल मेहरोत्रा, अध्यक्ष राष्ट्र जागरण उद्योग व्यापार मंडल
वैसे तो व्यापारी संगठन व्यापारियों की सेवा के लिए उनके शोषण ना हो सके उनके उत्थान के लिए बने थे, लेकिन कुछ व्यापारी नेताओं ने अपनी महत्वाकांक्षा पूर्ण करने और सत्ता का सुख पाने को व्यापारियों का ही शोषण करना शुरू कर दिया। जिसकी वजह से आज इतने संगठन खड़े हैं। यह दस्तूर अब भी जारी है। -सतीश चंद्र अग्रवाल, व्यापारी नेता
प्रदेश में व्यापार मण्डल का गठन हुए लगभग तीन दशक हो गए। व्यापारियों की समस्याओं व उत्पीड़न को रोकने के लिए व्यापार मंडल बना है। बरेली में प्रदेश स्तरीय व्यापार मंडल गिने चुने ही हैं पर सभी व्यापारी हित हेतु कार्य कर रहे हैं। जब बड़े आंदोलन की अवश्यकता पड़ती हैं तब सभी व्यापारी संगठन एक मंच पर भी आकर कार्य करते हैं। -रामकृष्ण शुक्ला, महानगर अध्यक्ष, व्यापारी सुरक्षा फोरम
व्यापारियों के हालात बहुत खराब हैं। सिर्फ अध्यक्ष पद की चाहत के कारण इतने व्यापार मंडलों का गठन हो गया। लेकिन वर्तमान में अभी भी सिर्फ दो से तीन व्यापार मंडल ही ठीक तरीके से काम कर रहे हैं। बाकी सभी अपनी आत्म संतुष्टी के लिए यह सब कर रहे हैं। -आशीष सिंघल, मंडल प्रभारी, पश्चिमी उप्र उद्योग व्यापार मंडल
हमारा व्यापार मंडल प्रदेश का सबसे बड़ा और पुराना संगठन है। 1974 में लाला विशंभर दयाल अग्रवाल और पंडित श्याम बिहारी मिश्रा ने इसकी स्थापना की थी। वर्तमान में बरेली में करीब एक दर्ज संगठन चल रहे हैं। पद के लालच में कुछ ने अपना संगठन अलग बना लिया है लेकिन वह भी हमसे जुड़े हैं। -राजेंद्र गुप्ता, प्रांतीय महामंत्री, उप्र उद्योग व्यापार मंडल
पंजीकृत व्यापारिक संगठनों की संख्या जिले में बमुश्किल चार से पांच ही है। व्यापारियों में एकजुटता की कोई कमी नहीं है। लेकिन खुद को ऊंचा साबित करने के लिए वह अपना संगठन अलग बना रहे हैं। जरूरत पड़ने पर सभी संगठन एक मंच पर ही साथ दिखाई देते हैं। -अनिल अग्रवाल, जिलाध्यक्ष, उप्र उद्योग व्यापार संगठन
वर्तमान की स्थिति यह है कि जिनका कोई व्यापार नहीं है वह भी व्यापार मंडल के अध्यक्ष बने हैं। पूरे प्रदेश में सिर्फ हमारा व्यापार मंडल ही सबसे बड़ा संगठन है। 1974 में इसकी नींव रखी गई थी। इसके बाद 1981 से लगातार जिलाध्यक्ष की कमान संभाल रहा हूं। -राजकुमार अग्रवाल, जिलाध्यक्ष, उप्र उद्योग व्यापार मंडल
