बेटी दिवस पर विशेष: पथरीले रास्तों से गुजरकर लिख रहीं सफलता की इबारत

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आशुतोष मिश्र/मुरादाबाद,अमृत विचार। काम के प्रति लगन, ईमानदारी, समर्पण और समय से जूझना। यह परिभाषा है आकांक्षा गर्ग की। बिना थके, बिना रुके वह सब कुछ हासिल करने का जज्बा है, जिसकी चाहत हर किसी सफल किरदार को होती है। आकांक्षा गर्ग के संकल्प का मतलब यह है कि हमें चलते रहना है और मीलों …

आशुतोष मिश्र/मुरादाबाद,अमृत विचार। काम के प्रति लगन, ईमानदारी, समर्पण और समय से जूझना। यह परिभाषा है आकांक्षा गर्ग की। बिना थके, बिना रुके वह सब कुछ हासिल करने का जज्बा है, जिसकी चाहत हर किसी सफल किरदार को होती है। आकांक्षा गर्ग के संकल्प का मतलब यह है कि हमें चलते रहना है और मीलों तक जाना है। युवा निर्यातक आकांक्षा आधी आबादी के लिए मुरादाबादी नजीर हैं। जिन्हें, दुनिया के सभी देशों के बायर नाम और ब्रांड से जानते हैं।

आकांक्षा गर्ग। निर्यातक

पड़ोसी जनपद बदायूं की मूल निवासी आकांक्षा की शिक्षा वनस्थली (राजस्थान) से लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय से हुई है। वित्त और एचआर की सेवा में कैरियर बनाने की सोच वाली आकांक्षा ने नोएडा से एमबीए की डिग्री हासिल की है। चाहत बैंकिंग क्षेत्र में जाने की थी, तो समय ने पहले पहले मौका नहीं दिया। बाद में सिंगापुर के बैंक में नौकरी भी मिल गई। लेकिन, तमाम पारिवारिक कारणों ने ऐसा करने नहीं दिया। बेटी के मन में स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता के भाव थे, तो पथरीले रास्तों पर भी निराशा नहीं हुई। इन दिनों मेटल- वुडन इंडस्ट्री में आकांक्षा का नाम है।

खूबसूरत दरी बनवा कर महिलाओं को काम के अवसर भी देती हैं। 2010 का साल इस बेटी के जीवन में उथल-पुथल लेकर आया। घरवाले शादी करना चाहते थे। लेकिन, बेटी अपने पैर पर खड़ा होना चाहती थी। इसलिए शादी को रजामंद नहीं हुई। साल 2017 में आकांक्षा के मन में उदासी ने डेरा बना लिया। लेकिन, हार नहीं मानी। माता-पिता का सहयोग और साथ मिला। उन लोगों से 50, 000 उधार लिए और उसके बाद मुरादाबाद की धरती को इस कारोबार के लिए चुना। जबकि 2013 से ही इंपोर्ट- एक्सपोर्ट को समझने की ललक थी। यहां के तमाम निर्यातकों से मुलाकात की।

कारोबार का गुणा- गणित समझना चाहा। लेकिन, सभी ने उम्मीद के अनुसार सहयोग और समर्थन नहीं दिया। धुन की पक्की और स्वावलंबन को समर्पित आकांक्षा कहां हार मानने वाली थीं। अब दिल्ली रोड पर आकांक्षा की फैक्ट्री है। आकांक्षा कहती हैं कि वह हर इंटरनेशनल फेयर और ट्रेड शो में जाती हैं। यूएसए का बिजनेस वीजा भी उन्हें हासिल है। इस कार्य में विश्वस्तरीय कारोबार का अवार्ड मिला है। बेटी दिवस पर आकांक्षा उन तमाम बेटियों के लिए नजीर हैं, जिनके मन में जज्बा, स्वावलंबन और आगे बढ़ने की चाहत है।

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