छत्रपाल के राज्यमंत्री बनने से बरेली में मंत्री पद का सूखा खत्म
बरेली, अमृत विचार। बहेड़ी विधायक छत्रपाल गंगवार को राज्यमंत्री बनाए जाने से बरेली में मंत्री का सूखा खत्म हो गया। विधानसभा चुनाव 2022 को ध्यान में रखकर एवं संतोष गंगवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर किए जाने से नाराज कुर्मी समाज को एकजुट करने के लिए राज्य सरकार ने छत्रपाल गंगवार पर दांव खेला है। …
बरेली, अमृत विचार। बहेड़ी विधायक छत्रपाल गंगवार को राज्यमंत्री बनाए जाने से बरेली में मंत्री का सूखा खत्म हो गया। विधानसभा चुनाव 2022 को ध्यान में रखकर एवं संतोष गंगवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर किए जाने से नाराज कुर्मी समाज को एकजुट करने के लिए राज्य सरकार ने छत्रपाल गंगवार पर दांव खेला है।
छत्रपाल गंगवार एक शिक्षक से मंत्री बने हैं। अर्थशास्त्र के प्रवक्ता होने के साथ वह धनी राम इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य बनकर 2018 में सेवानिवृत्त हुए थे। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में कई पदों को संभाल चुके बहेड़ी से दो बार के विधायक छत्रपाल को मंत्री पद देने से योगी सरकार ने सिर्फ बरेली ही नहीं, बल्कि पीलीभीत और बदायूं के कुर्मी वोटरों को साधने का प्रयास किया है।
कुर्मी वोट बरेली के 4 विधानसभाओं को करता है प्रभावित
बरेली मंडल की बात करें तो सबसे ज्यादा बरेली जिले की पांच विधानसभाओं को कुर्मी वोट प्रभावित करता है। राजनीति के जानकारों के मुताबिक कुर्मी वोट सबसे ज्यादा नवाबगंज विधानसभा के साथ बहेड़ी, मीरगंज, भोजीपुरा में हैं। यहां के वोटर काफी हद तक जीत तय करने में अहम भूमिका अदा करते हैं।
शहर और कैंट विधानसभा में भी अच्छी तादात में कुर्मी मतदाता हैं। यह मतदाता जिले के कुर्मी बाहुल्य क्षेत्र से आकर बसे हुए हैं। हालांकि बदायूं में कुर्मी मतदाता कम संख्या में हैं। पीलीभीत में भी कुर्मी वोट अच्छी संख्या में हैं। रामपुर व शाहजहांपुर में भी काफी संख्या में हैं। कानपुर, लखीमपुर बेल्ट और पूर्वांचल में भी कुर्मी वोटर हैं जो अलग सरनेम से जाने जाते हैं।
छत्रपाल गंगवार का प्रोफाइल
छत्रपाल सिंह गंगवार पुत्र राम लाल निवासी ग्राम व पोस्ट दमखोदा, तहसील बहेड़ी
- शिक्षा एमए -अर्थशास्त्र व बीएड
- प्रवक्ता अर्थशास्त्र वर्ष 1979-2009 तक
- प्रधानाचार्य 2009 से धनीराम इंटर कॉलेज में 2018 तक
- राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के विभाग प्रचारक 1985 से 1987
- विभाग शारीरिक प्रमुख 1993, जनशिक्षा परिषद बरेली 1997
इंटर कालेज के प्रवक्ता से मंत्री बनने तक के सफर में लगे 35 साल
अपने पैतृक गांव दमखोदा स्थित धनीराम इंटर कालेज में प्रवक्ता पद पर चयन होने के बाद से ही छत्रपाल गंगवार का दिल राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के लिए धड़कने लगा था। वह लंबे समय तक संघ से जुड़े रहे। 2007 में विधायक बनने से पूर्व तक वे विभाग प्रचारक समेत समेत संघ में विभिन्न पदों पर रहे।
छत्रपाल ने भाजपा के बैनर तले पहला चुनाव सन 1997 में लड़ा, पर तब उन्हें सम्मानजनक वोट ही हासिल हुए थे। 2002 में भाजपा प्रत्याशी रहे। 2007 में भाजपा से विधानसभा चुनाव लड़कर विधायक बने। 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी अताउर रहमान से मात्र 18 मतों से चुनाव हार गए और फिर पांच साल बाद अधिक मत बटोरकर 2017 में दोबारा विधायक बने।
मंत्री बनने से दमखोदा गांव खुशी से झूम उठा
छत्रपाल गंगवार का रूझान परिवार से अलहदा ही रहा और संघ से जुड़कर दशकों तक प्रचारक बने रहे। कहा जाता है कि उनका परिवार घोर कांग्रेसी था। पहली बार 2007 में मुखिया परिवार में विधायकी पहुंची। अब योगी सरकार में मंत्री बनने के बाद पूरा दमखोदा गांव खुशी में झूम उठा है। क्षेत्र में भी लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है। बताते हैं कि विधायक छत्रपाल गंगवार शिक्षक होने की वजह से शांत तथा सौम्य स्वभाव के माने जाते हैं।
