सीतापुर: इंस्पेक्टर बेटी ने जमीन बेंच कर खरीदे हथियार, अब गोल्ड पर निशाने की तैयारी

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Edited By Amrit Vichar
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सीतापुर। देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा तो आपने बहुतों में देखा होगा, लेकिन हम आप को एक ऐसी बेटी से रूबरू कराते हैं, जिसने देश के लिए कुछ कर गुजरने का ख्वाब सजाया और उस ख्वाब को पूरा करने के लिए अपनी गाढ़ी कमाई से खरीदी गई जमीन ही बेंच दी। जमीन …

सीतापुर। देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा तो आपने बहुतों में देखा होगा, लेकिन हम आप को एक ऐसी बेटी से रूबरू कराते हैं, जिसने देश के लिए कुछ कर गुजरने का ख्वाब सजाया और उस ख्वाब को पूरा करने के लिए अपनी गाढ़ी कमाई से खरीदी गई जमीन ही बेंच दी। जमीन बेंच कर उसने शूटिंग के लिए बेशकीमती विदेशी असलहे खरीदे। अब उसने इन हाईटेक असलहों से शूटिंग प्रैक्टिस भी शुरू कर दी है। हम बात कर रहे हैं रानी लक्ष्मी बाई खेल अवार्ड से नवाजी जा चुकीं यूपी पुलिस की चैंपियन शूटर इंस्पेक्टर रंजना गुप्ता की। रंजना गुप्ता किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन शूटिंग के लिए न्यौछावर कर दिया है।

देश-विदेश में उन्होंने बहुत नाम कमाया। कई खिताब अपने नाम किए। उनका इरादा ओलंपिक में देश के लिए खेलने का था, लेकिन नियति को शायद यह मंजूर नहीं था। बात 23 जनू 19 की है। रंजना गुप्ता धार्मिक यात्रा पर वैष्णोदेवी दर्शन को गई थीं। इसी बीच करीब 88 लाख रुपए कीमत के उनके विदेशी असलहे, कार्टेज, फायरिंग किट आदि 11वीं वाहिनी पीएसी के बैंडमिंटन हाल के एक कमरे में आग की भेंट चढ़ गए थे। इस घटना से हिम्मत और हौंसलों की मूर्ति रंजना बिल्कुट टूट सी गईं थीं। देश के लिए ओलंपिक में खेलने का उनका सपना टूट गया था। उन्हें लगा अब उनका शूटिंग कैरियर खत्म हो गया। रंजना गुप्ता कहती हैं कि इस घटना ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया था। मन खिन्न हो गया था।

मानसिक तौर पर भी उन्हें गहरा आघात लगा, लेकिन देश के लिए खेलने के उनके इरादे ने उनकी हिम्मत टूटने नहीं दी। कई जगह उन्होंने मदद की गुहार भी लगाई, लेकिन कोई खास नतीजा नहीं निकला। आखिरकार उन्होंने एक जुगत निकाली और पाई-पाई जोड़ कर खरीदी गई 50 वर्ग गज अपनी जमीन बेंच दी। जमीन बेंच कर रंजना ने फिर से विदेशी असलहे खरीदें हैं। लाखों रुपए खर्च कर इस महंगे खेल के लिए हाईटेक विदेश राइफलें, कारतूस और उपकरण खरीद लिए हैं। इसके बाद वह एकबार फिर नए जोश के साथ 11वीं वाहिनी पीएसी के शूटिंग रेंज पर प्रैक्टिस में जुट गई हैं। हर रोज वह घंटो पसीना बहा कर अपने टारगेट पर निशाना साध रही हैं।

वह बोलीं, शूटिंग ही मेरी जिंदगी है। मैं इससे दूर नहीं जा सकती। उन्हें देश के लिए देखा गया अपना ख्वाब पूरा करना है। रंजना की जिंदगी का एक खास पहलू यह भी है कि निशानेबाजी और उनके बीच कोई आड़े न आए, इसलिए उन्होंने शादी तक नहीं की। वह चौबीसों घंटे सिर्फ निशानेबाजी के लिए जीती हैं। सब इंस्पेक्टर से आउट आफ र्टन इंस्पेक्टर बनी रंजना गुप्ता उत्तर प्रदेश पुलिस की शूटिंग कोच भी हैं। यूपी पुलिस की शूटिंग टीम उन्हीं की देखरेख में सीतापुर में प्रैक्टिस भी करती है। दिसंबर 21 में होने वाली ऑल इंडिया शूटिंग प्रतियोगिता के लिए वह यूपी पुलिस की टीम को भी तैयार कर रही हैं।

आग की भेंट चढ़ गया था असलहों का यह जखीरा
आग लगने पर रंजना गुप्ता के ब्लैकर 3.8, ब्लैकर 30.06 राइफल, ग्रूनिंग एलमिगर 6एमएम, .22 एनसुट्ज, शूटिंग किट, 17 हजार कार्टेज आदि शूटिंग प्रतियोगिता में काम आने वाला साजो-सामन जलकर नष्ट हो गया था।

बेटी ने लगा दी मेडलों की झड़ी

यूपी पुलिस की इंस्पेक्टर रंजना गुप्ता ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मेडलों की झड़ी लगा दी है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अब तक वह 11 मेडल जीत चुकी हैं। अमेरिका में हुए वर्ड पुलिस गेम में तीन गोल्ड, दो सिल्वर, एक ब्रांज, इंडो-भूटान में आयोजित दो बार की प्रतियोगिता में चार गोल्ड सहित 11 मेडल जीते हैं। इसके अलावा नेशनल में 48 पदक जीत कर तीन बार चौम्पियन रही हैं। ऑल इंडिया पुलिस-पैरामिलिट्री फोर्स की शूटिंग प्रतियोगिताओं में 29 मेडल जीते हैं। रंजना गुप्ता का कहना है कि उन्हें अब खुद याद नहीं कि उत्तर प्रदेश पुलिस की शूटिंग प्रतियोगिताओं में कितने मेडल वह जीत चुकी हैं।

असलहों के कई बोर की माहिर खिलाड़ी हैं रंजना

वैसे तो शूटिंग के लिए प्रतियोगिताओं में विभिन्न बोर के असलहों का प्रयोग होता है, लेकिन रंजना गुप्ता बेहद महंगे माने जाने वाले कई हैवी बोर असलहों से अचूक निशाना लगाती हैं। उनका कहना है कि वह 3.8 बोर, 6एमएम, 30.06 बोर, .22 बोर जैसे हैवी रायफल से वह शूटिंग प्रतियाेगिताओं में भाग लेती हैं। इन बोर के असलहों से उनका निशाना अचूक रहता है।

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