बरेली: रोल मॉडल जसौली स्कूल में बगैर किताब के पढ़ रहे आधे छात्र
बरेली, अमृत विचार। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस सरकारी कंपोजिट स्कूल जसोली की गिनती प्रदेश में रोल मॉडल के रूप में होती है। यहां दाखिला लेने के लिए विधायक व सांसद तक की सिफारिश लगती है। बावजूद शिक्षा विभाग के अधिकारी छात्रों के लिए किताबों की व्यवस्था तक नहीं करा पा रहे हैं। स्कूल के आधे …
बरेली, अमृत विचार। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस सरकारी कंपोजिट स्कूल जसोली की गिनती प्रदेश में रोल मॉडल के रूप में होती है। यहां दाखिला लेने के लिए विधायक व सांसद तक की सिफारिश लगती है। बावजूद शिक्षा विभाग के अधिकारी छात्रों के लिए किताबों की व्यवस्था तक नहीं करा पा रहे हैं। स्कूल के आधे से ज्यादा छात्र करीब डेढ़ माह से बगैर किताब के पढ़ रहे हैं।
जसौली स्कूल अपनी खूबियों के लिए ही प्रदेशभर में जाना जाता है। स्कूल में मौजूदा वक्त में छात्र-छात्राओं की संख्या करीब 1660 है जिसमें करीब 100 छात्रों के प्रवेश अब भी प्रतीक्षा सूची में हैं। सहायक अध्यापक हरीशबाबू शर्मा ने बताया कि प्रतिदिन 1300 से 1400 की संख्या में छात्र-छात्राएं स्कूल में पढ़ने आते हैं। शिक्षक कम होने और छात्र संख्या ज्यादा होने के कारण स्कूल दो शिफ्टों में चलाया जा रहा है। छात्रों ने बताया कि किताबों के बिना उन्हें पढ़ाई करने में दिक्कत हो रही है।
छात्र प्रतिदिन शिक्षकों से किताबें देने के लिए कहते हैं लेकिन स्कूल में किताबें नहीं आई हैं। ऐसे में वे पढ़ाई में पिछड़ रहे हैं। इंचार्ज अध्यापिका पूनम गंगवार ने बताया कि हमने शुरू में 800 छात्रों के लिए किताबों की मांग भेजी थी। उतनी किताबें तो मिल गई थीं लेकिन छात्रों की संख्या बढ़ने पर दोबारा से किताबों की मांग खंड शिक्षाधिकारी से की गई लेकिन अभी तक बच्चों को किताबें नहीं मिल पाई हैं।
हॉलैंड के सरकारी स्कूल की तर्ज पर बना है स्कूल
जिलाधिकारी नितीश कुमार और बीएसए विनय कुमार के प्रयास से मारिया ग्रुप के चेयरमैन हाजी शकील कुरैशी ने स्कूल को अपने स्तर से हॉलैंड के सरकारी स्कूलों की तर्ज पर तैयार किया है। हर कक्षा की दीवार, फर्श पर अलग-अलग रंग और डिजाइन के टाइल्स लगाए गए हैं। इस स्कूल में 22 एसी लगाए गए हैं।
हमें एक भी किताब नहीं मिली है। स्कूल में शिक्षक जो पढ़ा देते हैं, उसका ही अध्ययन कर लेते हैं। घर पर बिना किताबों के ही पढ़ते हैं। अगर किताबें मिल जाएं तो अच्छे से पढ़ाई हो सकती है। -माहिरा फातिमा, कक्षा-5
हमें अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत की ही किताबें मिल पाई हैं। गणित की किताब न मिलने से पढ़ाई में दिक्कत हो रही है। शिक्षक जो काम दे देते हैं वो ही काम कर पाते हैं। -तूषा सकलैनी, कक्षा-5
संस्कृत और हिंदी की मात्र दो किताबें ही मिली हैं। स्कूल में दोस्तों के साथ पढ़ाई कर लेते हैं। घर पर बिना किताबों के पढ़ाई करने में दिक्कत होती है। -अनंत उपाध्याय, कक्षा 6
स्कूल तो रोज आते हैं। दोस्तों की किताबों से ही पढ़ाई करनी पड़ती है क्योंकि हमें अभी तक एक भी किताब नहीं मिली है। अगर मुझे भी किताबें मिल जाएं तो अच्छे से पढ़ाई कर सकूगीं। -अक्शा, कक्षा-6
मुझे संस्कृत, हिंदी, और महान व्यक्तित्व की ही किताबें मिल पाई हैं। अन्य किताबें न मिलने से गणित और अंग्रेजी अच्छी तरह से समझ में नहीं आ रही है। -प्रिन्स, कक्षा-6
स्कूल में छात्रों की संख्या बढ़ जाने के कारण सभी बच्चों को किताबें नहीं मिल पाई हैं। जल्द ही किताबें उपलब्ध करा दी जाएंगी। -विनय कुमार, बेसिक शिक्षा अधिकारी
