बरेली: पांच माह में 300 करोड़ की शराब पी गए शहरवासी

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। शहर में मदिरा प्रेमी मयखाने में जाम छलकाने में भी पीछे नहीं है। पिछले पांच माह में शहर के लोग 300 करोड़ रूपए की शराब गटक गए हैं। इसमें सबसे अधिक बिक्री देसी शराब की हुई है। रिकार्ड शराब की बिक्री से आबकारी विभाग को भी अधिक राजस्व प्राप्त हुआ है। कोरोना …

बरेली, अमृत विचार। शहर में मदिरा प्रेमी मयखाने में जाम छलकाने में भी पीछे नहीं है। पिछले पांच माह में शहर के लोग 300 करोड़ रूपए की शराब गटक गए हैं। इसमें सबसे अधिक बिक्री देसी शराब की हुई है। रिकार्ड शराब की बिक्री से आबकारी विभाग को भी अधिक राजस्व प्राप्त हुआ है। कोरोना की दूसरी लहर के बाद भी शराब की बिक्री का सिलसिला लगातार जारी है।

प्रदेश में कच्ची शराब पीने से हुई लोगों की मौत के बाद उसे बनाने और बेचने वालों पर आबकारी के साथ पुलिस ने भी शिकंजा कस दिया है। जिसके बाद लोगों का देशी शराब की तरफ से लोगों को रूझान बढ़ा है। आबकारी विभाग के मुताबिक 1 अप्रैल से लेकर अगस्त तक 17 लाख 83 हजार 402 बोतल विदेशी शराब बिकी। 36 लाख 90 हजार 992 बोतल बीयर की बिक्री हुई। वहीं, देसी शराब के शौकीन 56 लाख 77 हजार 372 लीटर शराब पी गए। जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि विदेशी और बियर की शराब के मुताबिक देसी शराब की बिक्री अधिक की गई है।

कोरोना काल में भी जमकर बिकी शराब
शराब की बिक्री कोरोना काल में भी कम नहीं हुई। पिछले वर्ष जब लॉकडाउन के बाद पहली बार शराब की दुकानें खुली थीं तो दुकानें के बाहर लंबी लाइनें लगी थीं। यही वजह रही कि जब भी कोरोना की वजह से दुकानें बंद होने के बाद खुलीं तो शराब की दुकानें खोली गईं। यहां तक कि इन्हें खोलने के लिए अलग समय भी निर्धारित किया गया।

कच्ची शराब की बिक्री जारी
आबकारी विभाग लगातार कच्ची शराब बेचने वालों पर कार्रवाई करता है लेकिन इसके बावजूद भी इसकी बिक्री पर पूरी तरह से रोक नहीं लग पा रही है। शहर से लेकर देहात क्षेत्रों में कच्ची शराब की जमकर बिक्री होती है। कई लोग तो कच्ची शराब बनाने में यूरिया, स्प्रिट व अन्य पदार्थ भी मिलाकर बेचते हैं। कई बार कच्ची शराब जहरीली हो जाने से लोगों की जान भी चली जाती है
पिछले पांच माह में करीब 300 करोड़ की शराब बिकी है। कच्ची शराब के खिलाफ चलाए गए अभियान और अवैध शराब पर शिकंजा कसने के कारण राजस्व का फायदा हुआ है। -देव नारायण दूबे, जिला आबकारी अधिकारी

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