अयोध्या: स्वावलंबी विद्यालय रनीवां में 61 साल से अखंड सूत यज्ञ का हो रहा आयोजन

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अयोध्या। जिले के ग्राम स्वावलंबी विद्यालय रनीवां में प्रत्येक वर्ष गांधी जंयती के अवसर पर अखंड सूत यज्ञ का आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही दो अक्टूबर से खादी वस्त्रों पर 25 फीसदी की छूट भी दी जाती है। बता दें कि अखंड सूत यज्ञ का आयोजन ग्राम स्वालंबी विद्यालय रनीवां अपने स्थापना काल …

अयोध्या। जिले के ग्राम स्वावलंबी विद्यालय रनीवां में प्रत्येक वर्ष गांधी जंयती के अवसर पर अखंड सूत यज्ञ का आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही दो अक्टूबर से खादी वस्त्रों पर 25 फीसदी की छूट भी दी जाती है। बता दें कि अखंड सूत यज्ञ का आयोजन ग्राम स्वालंबी विद्यालय रनीवां अपने स्थापना काल से ही करता चला आ रहा है।

गांधी के सपनों को साकार करने के लिए इस गांधी आश्रम की स्थापना सन् 1960 में हुई थी। 61 साल से प्रत्येक वर्ष गांधी जयंती के एक दिन पहले से ही चौबीस घंटे के लिए अखंड सूत यज्ञ आयोजन में चरखे पर सूत काटा जाता है। इसके लिए पालियों में गांधी आश्रम के साधकों की ड्यूटी संस्था के मंत्री की ओर से लगाई जाती है।

वहीं, संस्था के मुख्य प्रबंधक यमुना प्रसाद अवस्थी बताते हैं कि इस वर्ष भी दो अक्टूबर से खादी वस्त्रों पर 25 फीसदी की छूट दी जा रही है। उन्होंने संपन्न लोगों से आह्वान किया है कि छूट का लाभ उठाते हुए खादी वस्त्रों की खरीददारी करें। ताकि ग्रामीण अंचल के निर्बल लोगों को रोजगार मिल सके। जनौरा निवासी बबलू सिंह ने अखंड सूत यज्ञ से प्रभावित होकर त्यौहारों पर खादी वस्त्र खरीदने का संकल्प लिया। प्रदेश और केन्द्र में खादी विभाग के मंत्रालय भी हैं और खादी आयोग भी है।

गांधी जंयती पर खादी के उत्थान के लिए जोर से शोर भी मचता है लेकिन धरातल पर गांधी आश्रमों की बुरी दशा है। गांधी आश्रम आचार्य नगर नाका भी अपने स्वंय सेवकों के दम पर रेंग तो रहा है, लेकिन कर्जदार भी है। संस्था की जमीन पर मंगतों के साथ दंबगों का भी कब्जा है। खर्चा निकालने के लिए संस्था ने रोड की तरफ कुछ दुकानों का निर्माण कर किराए पर दे रखा है। अधिकांश भाग पर ऐसे लोगों ने कब्जा कर रखा है। जिनके शहर और देहात में आलीशान मकान हैं। अदालत में वर्षों से मुकदमा चल रहे है। साथ ही न्याय प्रक्रिया की धीमी गति गांधी के विचारों पर भारी पड़ रही है। वहीं, गांधी आश्रम में इस समय लगभग पचास स्वयं सेवक कार्य करते हैं। खादी वस्त्र नहीं विचार है के नारे को आत्मसात कर अपनी सेवाएं दे रहे इन स्वयं सेवकों को जीवन यापन के लिए साधारण सब तनख्वाह ही मिलती है। खादी वस्त्रों के मंहगे होने के सवाल पर संस्था के मंत्री ओम प्रकाश मिश्र कहते हैं कि कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित हो तो इसके दाम कम हो सकते हैं।

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