वीर सिंह बोले, मैं दो साल से बसपा में घुटन महसूस कर रहा था

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मुरादाबाद, अमृत विचार। वर्ष 1982 में बीएस फोर के सदस्य बने और 1984 में गठन के साथ बसपाई हुए राष्ट्रीय महासचिव वीर सिंह एडवोकेट ने रविवार को पार्टी छोड़ दी। इसके बाद लखनऊ में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। पहले बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती को पत्र लिखकर पार्टी छोड़ने की …

मुरादाबाद, अमृत विचार। वर्ष 1982 में बीएस फोर के सदस्य बने और 1984 में गठन के साथ बसपाई हुए राष्ट्रीय महासचिव वीर सिंह एडवोकेट ने रविवार को पार्टी छोड़ दी। इसके बाद लखनऊ में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। पहले बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती को पत्र लिखकर पार्टी छोड़ने की वजह बता दी।

वीर सिंह

अमृत विचार से बातचीत में बोले, 2 साल से अपमानित महसूस कर रहा था। तब मेरे साथ राष्ट्रीय कोर्डिनेटर बनाये गए जयप्रकाश ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी पर टिप्पणी कर दी थी। उस समारोह में मैं भी मंच पर था। इस वजह से बहन जी नाराज हो गईं। देशभर के पदाधिकारियों के सामने मुझे बेइज्जत किया। जबकि, मैंने राहुल गांधी का नाम तक नहीं लिया था।

तब से मैं पार्टी में अपमानित महसूस कर रहा था। 14 अप्रैल 1984 को बहुजन समाज पार्टी का गठन हुआ तो मैं उसमें सदस्य के रूप में शामिल हुआ। संगठन ने मुझे सम्मान भी दिया। 18 साल लगातार राज्यसभा का सदस्य रहा। लेकिन, अब संगठन में उन लोगों के अधीन काम करने को मजबूर किया जा रहा था, जिनको मैं पार्टी में लेकर आया। ऐसे में मैं और अपमानित नहीं हो सकता इसलिए पार्टी छोड़ दी।

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