लखनऊ: एक के बाद एक एक्सीडेंट, लेकिन कोई दोषी नहीं…
लखनऊ। सर, थानेदार पकड़ी जाने वाली बसों को अपने थाने में खड़ा करने से मना कर देते हैं…हम लोग अभियान चलाते हैं और बस मालिक ऑनलाइन चालान भर कर फिर से डग्गामारी शुरू कर देते हैं… इन डग्गमार वाहनों के खिलाफ अब कड़ा कानून बनाए जाने की जरूरत है। कुछ इस तरह की दलीलें परिवहन …
लखनऊ। सर, थानेदार पकड़ी जाने वाली बसों को अपने थाने में खड़ा करने से मना कर देते हैं…हम लोग अभियान चलाते हैं और बस मालिक ऑनलाइन चालान भर कर फिर से डग्गामारी शुरू कर देते हैं… इन डग्गमार वाहनों के खिलाफ अब कड़ा कानून बनाए जाने की जरूरत है। कुछ इस तरह की दलीलें परिवहन विभाग के अधिकारी दे रहे थे। ऊपर से नीचे तक सभी इस एक्सीडेंट को अन्य विभागों की गलती बताने पर जुटे थे।
बाराबंकी आरटीओ ऑफिस से लेकर परिवहन विभाग मुख्यालय में हादसे के लिए अन्य कारणों को दोषी बता रहे थे। बीते जुलाई माह में राम सनेही घाट के पास हुए हादसे में कई लोगों की जान चली गई थी। इस हादसे में अधिकारियों ने लीपापोती कर अपनी गर्दनें बचा ली। बाराबंकी में लगातार दूसरा हादसा होने पर फिर से अधिकारी अपने मातहतों को बचाने में जुटे हैं।
पिछली बार हादसे के बाद जारी किए गए थे यह आदेश, लेकिन इन्हें आज तक नहीं माना गया
- ऑल इंडिया और यूपी परिमट वाली ऐसी बसें जिनका चालान पांच या उससे अधिक किया गया है, तत्काल प्रभाव से ऐसी बसों का परिमट निरस्त किया जाए।
- बसों की फिटनेस करते समय फैब्रिकेशन बस बॉडी कोड के अनुसार होना चाहिए। बिना इसके प्राविधिक निरीक्षक बस करते हैं तो उनके विरुद्ध एक्शन लिया जाएगा।
- एनएचएआई के टोल प्लाजा से ओवरलोड वाहनों की सूचना नियमित रूप से परिवहन विभाग को उपलब्ध कराई जाए।
- अनधिकृत रूप से संचालित बसों के विरूद्ध कार्रवाई के लिए प्रदेश के एंट्री और एग्जिट प्वाइंट पर विशेष रूप से चेकिंग की जाए।
बसों में अधिक यात्री पाए जाने पर प्रति यात्री के हिसाब से जुर्माना काटा जाए।
जो रिपोर्ट बाराबंकी से आई है उसमें किसी घुमंतू पशु के रोड पर आ जाने के कारण इस हादसे का होना बताया जा रहा है। क्योंकि रोड पर किसी तरह का कहीं कोई संकेतक भी नहीं था और ना ही कोई मोड़। ऐसे में जानवर को बचाने के चक्कर में यह हादसा हुआ है…निर्मल प्रसाद, उप परिवहन आयुक्त लखनऊ जोन,परिवहन विभाग उत्तर प्रदेश।
