रायबरेली: 28 साल बाद खुला रामलीला मैदान का ताला, दशहरा मेला के लिए रास्ता साफ

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Edited By Amrit Vichar
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रायबरेली। 28 साल बाद ऊंचाहार में दशहरा मेला और रामलीला फिर से होगी। असल में रामलीला मैदान के स्वामित्व के विवाद को लेकर स्टेआदेश के कारण ऊंचाहार का दशहरा मेला व रामलीला बंद थी। एसडीएम ने बुधवार को मैदान का ताला खुलवा दिया। इस तरह इस बार 15 अक्टूबर को दशहरा मेला का रास्ता साफ …

रायबरेली। 28 साल बाद ऊंचाहार में दशहरा मेला और रामलीला फिर से होगी। असल में रामलीला मैदान के स्वामित्व के विवाद को लेकर स्टेआदेश के कारण ऊंचाहार का दशहरा मेला व रामलीला बंद थी। एसडीएम ने बुधवार को मैदान का ताला खुलवा दिया। इस तरह इस बार 15 अक्टूबर को दशहरा मेला का रास्ता साफ हो गया।

बताते हैं कि ऊंचाहार रामलीला मैदान विवाद में उच्च न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश खारिज कर दिया गया था जिस पर स्थानीय लोगों की मांग पर जिला प्रशासन ने मैदान की चारदीवारी का ताला खोल दिया है। बुधवार की सुबह एसडीएम विनय मिश्रा और कोतवाल शिव शंकर सिंह ने दोनों पक्षों के साथ विवादित मैदान का ताला खोलवा कर दशहरा मेला व रामलीला की अनुमति दी तो स्थानीय लोगों ने आतिशबाजी करके जश्न मनाया।

हालांकि मंगलवार को कोतवाली परिसर में भी दोनों पक्षों के बीच जमकर बवाल हुआ था। उसके बाद दूसरे दिन रामलीला समिति के पक्ष में प्रशासन ने कदम उठाकर ऊंचाहार के इस ऐतिहासिक मेला उत्सव मैदान को कब्जे से मुक्त करा दिया है।

करीब 28 साल पहले स्वामित्व के विवाद में सूरज मल मुरारका की एक याचिका पर उच्च न्यायालय ने मेला और रामलीला के आयोजन पर रोक लगा दिया था। मामले में कमिश्नरी न्यायालय ने विवाद का फैसला रामलीला समिति के पक्ष में दिया है। जबकि उसके बाद राजस्व परिषद न्यायालय में वाद को दायर किया गया है, जहां प्रकरण विचाराधीन है। इसी के साथ उच्च न्यायालय का स्थगन आदेश भी निरस्त हो गया था। जिसको लेकर रामलीला समिति के अगुवा कृष्ण चन्द्र जायसवाल के नेतृत्व में ऊंचाहार के स्थानीय लोग इस बार मेला और रामलीला आयोजन हेतु रामलीला मैदान को कब्जे से मुक्त कराने की मांग कर रहे थे। एसडीएम ने बताया कि तात्कालिक रूप से रामलीला आयोजन की अनुमति दी गई है। अंतिम फैसला आने तक मैदान पर किसी भी पक्ष का कब्जा नहीं रहेगा ।

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