बरेली: निर्माण विभाग के विरुद्ध ठेकेदारों ने खोला मोर्चा, खोलेंगे चिट्ठा
बरेली, अमृत विचार। नगर निगम के निर्माण विभाग में भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों के उजागर होने के बाद अब करोड़ों के भुगतान न होने से परेशान ठेकेदारों ने भी मोर्चा खोलने की तैयारी शुरू कर दी है। ठेकेदारों का कहना कि निर्माण विभाग के इंजीनियर निर्माण कार्यों के बिल ही समय से नहीं बनाते हैं। …
बरेली, अमृत विचार। नगर निगम के निर्माण विभाग में भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों के उजागर होने के बाद अब करोड़ों के भुगतान न होने से परेशान ठेकेदारों ने भी मोर्चा खोलने की तैयारी शुरू कर दी है। ठेकेदारों का कहना कि निर्माण विभाग के इंजीनियर निर्माण कार्यों के बिल ही समय से नहीं बनाते हैं। इस वजह से भुगतान नहीं हो पा रहा है। इन मामलों को लेकर नगर निगम ठेकेदार कल्याण समिति सोमवार को नगर आयुक्त से मिलकर नगर आयुक्त के सामने काले चिट्ठे को खोलेगी। ठेकेदारों का कहना है कि करोड़ों के भुगतान लटके होने की वजह से मजबूरी में उन्हें निर्माण कार्य अधूरी ही छोड़ने पड़े हैं।
निर्माण विभाग से जुड़ी भ्रष्टाचार की तमाम शिकायतें हुई हैं। इनकी एंटी करप्शन तक जांच चल रही है। इन मामलों को लेकर मेयर डॉ. उमेश गौतम ने भी निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर को निशाने पर लेते हुए निर्माण कार्यों के घपलों के मामले नगर विकास मंत्री तक पहुंचाए हैं। इस बीच नगर निगम के ठेकेदारों ने भी लामबंद होकर मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है।
ठेकेदारों का कहना है कि 15वें वित्त आयोग से नगर निगम 50 से 60 करोड़ रुपये तक काम करा रहा है। ठेकेदारों को काम आवंटित कर दिए गए लेकिन उनके भुगतान फंसा दिए गए हैं। लाखों रुपये जेब से खर्च करने के बाद जब ठेकेदार बकाया किस्तों का भुगतान मांगता है तो उसे टकरा दिया जाता है। जबकि ठेकेदारों का कहना है कि निर्माण विभाग के अभियंताओं के चक्कर काटते रहो, भुगतान तो दूर बिल तक नहीं बनाते है।
ऐसे में बजट के अभाव में बड़ी संख्या में ठेकेदारों ने निर्माण कार्यों को बीच में ही आधा-अधूरा छोड़ दिया है। इससे शहर के लोगों को आवागमन में काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। ठेकेदारों का कहना है कि करोड़ों रुपये का पेमेंट न होने से परेशान ठेकेदारों ने दो हफ्ते पहले मीटिंग की थी लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला है। अब सोमवार को नगर आयुक्त अभिषेक आनंद से मिलकर इंजीनियरों की मनमानी और उनके भ्रष्टाचार के मामले खोले जाएंगे।
भ्रष्टाचार की वजह से फंस गई विकास की गाड़ी
नगर निगम में भ्रष्टाचार की वजह से विकास की गाड़ी लटक गई है। दुर्गानगर, सुभाषनगर, संजयनगर, स्टेडियम रोड सहित तमाम सड़कों के काम अधूरे पड़े हैं। तमाम गली-मोहल्लों में सीसी रोड और नाली निर्माण भी नहीं हो पा रहे हैं। जनता को लंबे समय से इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
कई गंभीर आरोप में फंसे हैं चीफ सहित कई इंजीनियर
निर्माण विभाग के चीफ सहित कई इंजीनियरों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि नगर निगम ने 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत करीब 35 करोड़ रुपये के टेंडर किए थे। इसमें मुख्य अभियंता ने करीब 70 फीसद के लगभग 25 करोड़ रुपये के काम एक महिला अभियंता को आवंटित कर दिए। इधर पूर्व पार्षद राजेश तिवारी ने मुख्यमंत्री के नाम पत्र 4 अगस्त 2021 को भेजा। इसमें नगर निगम के लेखा विभाग और निर्माण विभाग को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
इन मामलों का शासन स्तर तक संज्ञान लेने के बाद लखनऊ से एंटी करप्शन ने कई बिंदुओं पर प्रशासनिक स्तर से जांच आख्या मांगी है। इससे पहले मेयर ने 11 अक्टूबर 2021 को नगर विकास मंत्री को नगर निगम में चल रहे घपले-घोटालों के खेल को पहुंचाते हुए कड़ी चिट्ठी भेजी, जिसमें मुख्य अभियंता बीके सिंह को नगर निगम से हटाए जाने की पैरवी की गई है।
निर्माण विभाग के इंजीनियर ठेकेदारों को परेशान कर रहे हैं। करोड़ों के कामों के वर्क ऑर्डर देने के बावजूद ठेकेदारों का भुगतान करना दूर निगम के अभियंता जल्द उनके बिल तक नहीं तैयार करते हैं। इससे ठेकेदार परेशान हैं। ठेकेदार संघ सोमवार को नगर आयुक्त से मिलकर अभियंताओं के इस रवैये का खुलासा करेगा। -धर्नेश सोना, अध्यक्ष, नगर निगम ठेकेदार कल्याण समिति
