बरेली: दुनिया में जहां भी रहें आबाद रहेंगे, आमिना के लाल का मिलाद करेंगे
बरेली, अमृत विचार। शहर भर में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी की धूम दिखाई दे रही है। घरों पर लगे रंग बिरंगे झंडे और गली-गली जगमगाती रोशनी आमद-ए-मुस्तफा का अहसास करा रही हैं। पूरा शहर दुल्हन की तरह सजा हुआ है तो दूसरी तरफ नात-ए-नबी की आवाजें घरों-घरों गूंज रही हैं। सोमवार को ईद मिलादुन्नबी की पूर्व संध्या …
बरेली, अमृत विचार। शहर भर में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी की धूम दिखाई दे रही है। घरों पर लगे रंग बिरंगे झंडे और गली-गली जगमगाती रोशनी आमद-ए-मुस्तफा का अहसास करा रही हैं। पूरा शहर दुल्हन की तरह सजा हुआ है तो दूसरी तरफ नात-ए-नबी की आवाजें घरों-घरों गूंज रही हैं। सोमवार को ईद मिलादुन्नबी की पूर्व संध्या पर पुराना शहर से जुलूस निकाला जाएगा। जबकि मंगलवार को कोहाड़ापीर से जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला जाना है।
पुराना शहर में मुन्ना खां के नीम छह मीनार मस्जिद से शाम चार बजे अंजुमन इत्तेहादुल मुस्लिमीन की ओर से जुलूस का आयोजन किया जाएगा। 47वां जुलूसे मोहम्मदी दरगाह तहसीनी के सज्जादानशीन मौलाना हस्सान मियां की कयादत में निकलेगा। यह जुलूस पुराना शहर के अलग-अलग इलाकों में घूमता हुआ देर रात वापस छह मीनार मस्जिद में खत्म होगा। अगले दिन मंगलवार को कोहाड़ापीर से जुलूस निकाला जाएगा। यह जुलूस कुतुबखाना, नोवल्टी, के रास्ते इस्लामिया रोड से दरगाह आला हजरत पर खत्म होगा।
प्रशासन ने हर अंजुमन में अधिकतम 30 लोगों के शामिल होने की अनुमति दी है। डीजी, साउंड पर पाबंदी लगाई है। अंजुमन कमेटी के सचिव अंजुम शमीम के अनुसार कमेटी के सदर इमशाद हुसैन के साथ बैठक कर फैसला लिया गया है कि जुलूस में लोग डीजे, साउंड, सियासी झंडे, तलवारें लेकर नहीं आएंगे और नारे भी नहीं लगाएंगे। जुलूस में महिलाओं को आने के लिए भी मना किया गया है।
