जन्मदिन विशेष: ‘गिफ्टेड डांसिंग स्टार थे शम्मी कपूर’
मुंबई। 2013 की बात है शायद , ठीक – ठीक नहीं याद आ रहा । सरोज खान जी से बातचीत हो रही थी । पता लगा कि फ़िल्म ‘ जंगली ‘ का गाना ‘ याहू …….’ जो शम्मी कपूर पर फिल्माया गया था उसकी कोरियोग्राफर भी सरोज खान थीं । उस समय वह बच्ची थीं। …
मुंबई। 2013 की बात है शायद , ठीक – ठीक नहीं याद आ रहा । सरोज खान जी से बातचीत हो रही थी । पता लगा कि फ़िल्म ‘ जंगली ‘ का गाना ‘ याहू …….’ जो शम्मी कपूर पर फिल्माया गया था उसकी कोरियोग्राफर भी सरोज खान थीं । उस समय वह बच्ची थीं। 13 – 14 साल की और साउथ के प्रख्यात डांस मास्टर सोहन लाल की असिस्टेंट । शम्मी कपूर और बैजयंती माला को डांस सिखाना उनका पहला अनुभव था । तब शम्मी कपूर ने कहा था – ‘ ये बच्ची क्या डांस सिखाएगी ? अब यही बाकी रह गया है बच्चों से सीखना ? ।’ सोहनलाल ने कहा था – ‘ इससे जितना ही सीख लो आपके लिए बहुत काफी है ‘।
* इतना टफ डांस , आपने कैसे गाइड किया होगा शम्मी कपूर को ?
* मैं क्या उन्हें गाइड करती या कोई । वह पैदायसी बल्कि कहिये गिफ्टेड डांसिंग स्टार थे ।
सचमुच शम्मी कपूर के डांस का मैं आज तक फैन हूं । सिर को जुंम्बिश और एक निश्चित स्पेस यानी तय घेरे में ही गाने के एक – एक शब्द को गजब की लचक से और भर देना उनकी अप्रतिम खूबी थी । मैं उन्हें पहला रॉक स्टार मानता हूं । ‘ आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा ..’ ( फ़िल्म तीसरी मंजिल ) इस गाने पर सिर का झटकना , कंधे , कमर और पांव की एकदम अलग – अलग लेकिन सुसंगत थिरकन उन्हें नृत्य अभिव्यक्ति में आजाद करती थी। इस गीत में उनके शरीर के हर हिस्से की लयात्मक मरोड़ , आक्रामक आबनूसी आंच , एक नृत्य कोलाज या सिंफनी में बदलती जाती थी ।
* यही मैं भी कहना चाहती थी ( सरोज खान ने कहा )
* इस वक्त अभिनेताओं में बेहतर डांसर ?
* ऋत्विक रोशन , शाहिद कपूर , शाहरुख , रणवीर कपूर , बहुत अच्छे डांसर हैं । लेकिन शम्मी कपूर मौलिक थे । मैं नहीं मानती कि वह एल्विस प्रिसले की नकल भर थे । मैं तो मानती हूं कि बाद में प्रचलन में आए ब्रेक डांस की भी अपनी अलग स्टाइल में शुरुआत करने वाले शम्मी कपूर ही थे । वह गाने की बीट पकड़ कर डांस करते थे ।
फिल्मों की भी अच्छी समझ रखने वाली समाज विज्ञानी मधुलिमा शेखर ‘ जेएनयूआइट’ कहती हैं — शम्मी कपूर का डांस दरअसल आजादी के बाद पैदा पीढ़ी के खिलंदड़ सपनों का पड़ाव था । जिसमे कई बार गीत की नई शक्ल भी उभरती थी , हवा , पानी और मौसम भी बदलता था ।
शम्मी का डांस कुछ बगावती भी था । इसलिए लीक से अलग का । हदें तोड़ता हुआ । ‘ याहू …’ गाने पर उनका डांस सारी वर्जनाओं को तोड़ते हुए बादल को बाहों में भर लेने की जिद थी । उनका डांस दरअसल ‘ फ्री फ्लाइट ‘ थी — ‘ लाल छड़ी मैदान खड़ी … हम दिल से गये …’ गाने पर उनका डांस वर्जित हलकों में भी सेंध का दुस्साहस है । इसीलिये वह अपने दौर के नौजवानों के स्टार थे । वह डांस में गति रचते थे , इसलिये मुझे पसंद थे । कई बार उनका डांस यूट्यूब पर देख – देख कर मैंने भी नकल की कोशिश की लेकिन सपनों का परिंदा अपने भीतर कहां से लाता । फिर भी एक – दो गाने पर उन्हें कॉपी कर लेता हूं । वरिष्ठ लोकधर्मी पत्रकार रविशंकर तिवारी और चिंतक पत्रकार रवींद्र ओझा ने देखा है ।
ट्रेजडी किंग,अभिनय के शाहंशाह दिलीप कुमार , ग्रेट शो मैन , समाजवादी सपनों के सौदागर राजकूपर और एवरग्रीन देवानन्द के दौर में शम्मी कपूर ने अपनी आइकॉनिक शम्मी कपूर स्टाइल खुद ईजाद की । वह किसी की गढ़न नहीं थे । कहते है अजीमोश्शान प्ले बैक सिंगर मोहम्मद रफी साहब को शम्मी कपूर के लिये अपनी गाने की स्टाइल बदलनी पड़ी । कभी – कभी लगता था रफी साहब उन्हीं के लिए हैं । लेकिन आज तक नहीं पता चला कि वह अपने सुर में लोच शम्मी कपूर के डांस का लाते थे या रफी के सुर की लोच शम्मी कपूर अपने डांस में लाते थे ।
1957 से 1971 तक उन्होंने ‘तुमसा नहीं देखा’, ‘प्रोफेसर’ ,‘दिल देके देखो’, ‘जंगली’, ‘उजाला’, ‘चाइना गेट’, ‘ब्लफ़मास्टर’, ‘कश्मीर की कली’, ‘जानवर’, ‘ब्रह्मचारी’, ‘ बदतमीज’, ‘तुमसे अच्छा कौन है’ ,’ लाट साहब’, ‘ऐन इवनिंग इन पेरिस’ ,’ तीसरी मंजिल ‘ जैसी दर्जनों सुपर – डुपर हिट फिल्में दीं ।
आख़िरी बार वो अपने पोते रणबीर कपूर की फ़िल्म ‘रॉकस्टार’ में शहनाई वादक के किरदार में नज़र आए थे । उन्होंने रणबीर के किरदार के बारे में पीयूष मिश्रा से कहा –‘ये बड़ा जानवर है, तुम्हारे पिंजड़े में नहीं आएगा’। और सच है रणवीर कपूर बहुत संम्भावनाशील है । उसमें बहुत जान है । रणवीर से मेरी दो अच्छी मुलाकातें हैं ।
-राघवेंद्र दुबे
