रामपुर में महफिल-ए-नूर में शायरों ने खूब लूटी वाह-वाही
रामपुर, अमृत विचार। इमामबाड़ा किला में हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलैही वसल्लम और हजरत इमाम जाफर सादिक अलैहिस्सलाम की यौमे पैदाइश पर महफिल-ए-नूर में शायरों ने खूब वाह-वाही लूटी। इस मौके पर इमामबारगाह को रंग-बिरंगी रोशनियों से सजाया गया। किला स्थित इमामबाड़ा किला में शनिवार/रविवार की रात मौलाना अली मोहम्मद नकवी की सदारत में महफिले …
रामपुर, अमृत विचार। इमामबाड़ा किला में हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलैही वसल्लम और हजरत इमाम जाफर सादिक अलैहिस्सलाम की यौमे पैदाइश पर महफिल-ए-नूर में शायरों ने खूब वाह-वाही लूटी। इस मौके पर इमामबारगाह को रंग-बिरंगी रोशनियों से सजाया गया।
किला स्थित इमामबाड़ा किला में शनिवार/रविवार की रात मौलाना अली मोहम्मद नकवी की सदारत में महफिले नूर हुई। महफिल की निजामत कर रहे शहजादा गुलरेज ने लखनऊ से आए डा. नैयर जलालपुरी ने कहा-मेरा कुरआन भी तौरेत भी इंजील भी तुम- तुमने कांटों को भी बख्शे हैं अता के जलवे, नजर आने लगे बंदे में खुदा के जलवे- ए मोहम्मद मेरे हर जख्म मरहम भी तुम-जमजमा हम्द का तुम, नात का सरगम भी तुम। यह जो इंसानों को इस्लाम दिया है तुमने-चैन से जीने का पैगाम दिया है तुमने। इसके बाद शहजादा गुलरेज ने रुबाई पढ़ी-तख्लीक में भी नूर है अव्वल तेरा-है जिक्र सहीफो में मुसलसल तेरा, तौसीफ बशर से तेरी मुमकिन ही नहीं-कुरआन तआर्रुफ है मुकम्मल तेरा। इनके अलावा डा.नाशिर नकवी अमरोहा, मुजताहिद फराज, शुऐब नौगांवी, अदील बरेलवी और अकील नोमानी ने कलाम पेश किए। संचालन डा. नैयर जलालपुरी ने किया।
