लखनऊ जिला कारागार में नहीं थम रही आत्महत्या की वारदातें, जानें क्यों?
लखनऊ। लखनऊ जिला कारागार में बंदियों की आत्महत्या की वारदातें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। वहीं जेल प्रशासन आत्महत्याओं को रोकने में नाकाम है। भले ही शासन की ओर से कई बार सुझाव और सिफारिशें भेजी जाती रही है लेकिन सिफारिशें जेल प्रशासन की आलमारियों में धूल फांकती रही हैं। जिसका नतीजा एक …
लखनऊ। लखनऊ जिला कारागार में बंदियों की आत्महत्या की वारदातें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। वहीं जेल प्रशासन आत्महत्याओं को रोकने में नाकाम है। भले ही शासन की ओर से कई बार सुझाव और सिफारिशें भेजी जाती रही है लेकिन सिफारिशें जेल प्रशासन की आलमारियों में धूल फांकती रही हैं। जिसका नतीजा एक बार फिर सामने आया। सीतापुर निवासी एक विचाराधीन बंदी रूपेश ने 26 अक्टूबर को सुसाइड नोट लिखने के बाद आत्महत्या कर लिया।
बंदी रूपेश को डकैती के मामले में गोसाईगंज पुलिस ने 12 अगस्त को जेल में भेज दिया था। उसने लिखे गए सुसाइड नोट में खुद को निर्दोष बताते हुए गोसाईगंज पुलिस पर झूठे मुकदमें में फंसाने का आरोप लगाया था। घटना की जांच के लिए दो कमेटियां बनाई गई हैं। जिसमें डीआईजी रेंज शैलेस मैत्रेय जांच कर रहे हैं। दूसरी कमेटी में न्यायिक अधिकारी को शामिल किए जाने की सिफारिश की गई है।
ये बंदी कर चुके हैं आत्महत्या
- 17 सितम्बर 2018 को 45 वर्षीय गोपी ने जेल में फांसी लगाकर जान दे दी।
- 29 अगस्त 2016 को काकोरी के काजीखेड़ा निवासी 30 वर्षीय सरवन ने कारागर सेल नंबर 10 में फांसी लगा ली।
- 3 मई 2015 को नन्कउ का शव दरवाजे के ऊपर लगी ग्रिल में शाॅल के सहारे लटका मिला था।
- 28 दिसम्बर 2014 को बंदी रियाज ने रोशनदार से लटक कर जान दे दी।
- 8 अगस्त 2013 को बंदी राजकुमार का जेल में लटकता मिला शव।
- 22 जून 2011 को डॉ योगेन्द्र सचान की जेल में संदिग्ध हालात में मौत जिसकी सीबीआई ने जांच तक हुई।
समय समय पर जेल में सुधार के लिए शासन की ओर सुझाव भेजे जाते हैं। उन्हीं के आधार पर जेल की खामियों को दूर किया जाता है। बंदी या फिर कैदी की मौत पर रूटीन जांच कमेटियां गठित होती है। जांच के बाद कमेटी भंग कर दी जाती है। इस तरह के मामले में जेल स्तर और न्यायिक स्तर की कमेटी बनाई जाती है…डीजी जेल प्रवक्ता संतोष कुमार।
