लखनऊ: विधानसभा में अपना दल के बराबर आई बसपा
लखनऊ। विधानसभा में अब अपना दल के बराबर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) हो गई हैं। विधानसभा में 16 सदस्यों वाली बसपा के एक सदस्य का निधन हो चुका हैं, जबकि छह ने बाकायदा सपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है। ऐसे में तकनीकी तौर पर भले ही बसपा के 15 सदस्य हों, लेकिन असल में …
लखनऊ। विधानसभा में अब अपना दल के बराबर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) हो गई हैं। विधानसभा में 16 सदस्यों वाली बसपा के एक सदस्य का निधन हो चुका हैं, जबकि छह ने बाकायदा सपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है। ऐसे में तकनीकी तौर पर भले ही बसपा के 15 सदस्य हों, लेकिन असल में वह अपना दल के नौ सदस्यों के बराबर ही रह गई है।
विधानसभा में बीते साढ़े चार साल में बसपा की सीटें लगातार कम होती चली गई। कई नेताओं को पार्टी प्रमुख मायावती ने स्वयं ही बाहर का रास्ता दिखा दिया तो कुछ स्वयं ही दूसरे दल में चले गए। ऐसे में राष्ट्रीय पार्टी होने के बावजूद अब बसपा का ग्राफ लगातार गिरता ही गया। बसपा ने पूर्व दिनों ब्राह्मण सम्मेलन किया था, इसके बाद मायावती ने महारैली की।
विधानसभा चुनाव होने के बावजूद अब बसपा की राजनीतिक सक्रियता कम हो गई है जबकि इस समय कोई भी राजनैतिक दल हो, सभी की सतर्कता लगातार बढ़ती जा रही हैं। प्रदेश में होने वाली कोई घटना या राजनीतिक बयानबाजी हो, मायावती यदा-कदा ही ट्ववीट कर अपनी प्रतिक्रिया देती हैं। वैसे मायावती विधानसभा चुनाव को लेकर उनकी सक्रियता को सभी ने देखा है।
राजनीतिक विशेषज्ञ प्रो. एपी तिवारी ने कहा कि बसपा अपने कैडर से मजबूत हैं और उनके पास मजबूत वोट बैंक है, हालांकि बीते विधानसभा चुनाव में उनका वोट कुछ छिटका था लेकिन इस बार महंगाई के मुद्दें पर उनक वोट वापस जाने की संभावना हैं। वे अन्य पार्टियों की तरह दिखावा कम करना पसंद करती है, उनका रैली अभी कुछ दिन पहले हुई थी, ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि विधानसभा चुनाव को लेकर निश्चित तौर अंदुरूनी तैयारी कर रही होंगी।
14 मार्च 2017 को गठित विधानसभा में बसपा के 19 विधायक जीतकर आए थे। इसमें बसपा विधायक रितेश पांडेय जलालपुर विधानसभा सीट से थे, उन्होंने 2019 में लोकसभा चुनाव में अंबेडकरनगर संसदीय सीट से चुनाव जीते। उन्होंने विधानसभा सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया। इसके बाद बसपा की अध्यक्ष मायावती ने अपने दो प्रमुख नेताओं को बाहर निकाल दिया। जिसमें अम्बेडकर नगर की अकबरपुर सीट से राम अचल राजभर और कटेहरी सीट से लालजी वर्मा थे।
हालांकि दोनों नेता बसपा के पुराने सदस्यों में रहे हैं लेकिन आरोप है कि इनकी गतिविधियां पार्टी विरोधी थी, जिसके आधार पर उन्हें बाहर निकाला गया है। इससे विधानसभा में वे असंबद्ध सदस्य के रूप में मौजूद हैं। इससे बसपा के 18 में से 16 विधायक ही रह गए और इसके बाद हाल ही में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व विधायक सुखदेव राजभर के निधन हो गया।
इससे एक सीट और खाली हो गई। अब बसपा के 15 सदस्य रह गए। इन 15 सदस्यों में छह विधायक सपा में शामिल हो गए हैं। हालांकि तकनीकी तौर पर फिलहाल वे बसपा के ही विधायक है लेकिन अब उन्होंने सपा की सदस्यता ले ली है। इससे अब उनकी संख्या नौ रह गई है और विधानसभा में अपना दल के भी नौ ही विधायक हैं। ऐसे में अब विधानसभा में अपना दल और बसपा बराबर हो गई हैं।
