बरेली: कोरोना की मार, 18 हजार कर्जदारों पर फंसा बैंक का दो अरब रुपए
बरेली, अमृत विचार। कोरोना भले ही खत्म होने लगा हो लेकिन इसकी वजह से उपजे हालात ने व्यापार ही नहीं नौकरीपेशा व आम लोगों की कमर तोड़ दी है। आलम यह है कि तमाम कोशिशों के बाद भी करीब 18 हजार कर्जदार बैंकों का ऋण नहीं चुका पा रहे हैं। जिले के बैंकों की दो …
बरेली, अमृत विचार। कोरोना भले ही खत्म होने लगा हो लेकिन इसकी वजह से उपजे हालात ने व्यापार ही नहीं नौकरीपेशा व आम लोगों की कमर तोड़ दी है। आलम यह है कि तमाम कोशिशों के बाद भी करीब 18 हजार कर्जदार बैंकों का ऋण नहीं चुका पा रहे हैं। जिले के बैंकों की दो अरब रुपये की रकम इन पर बकाया है। बैंक अफसरों के मुताबिक इनमें से किसी ने व्यवसाय के लिए कर्ज लिया था तो किसी ने बैंक से ऋण लेकर घर बनवाया था। बड़ी संख्या में वाहन भी खरीदे गए। इधर, ऋण अदायगी की प्रक्रिया कोरोना काल में सबसे ज्यादा बाधित हुई।
जनपद में बैंकों से तीन लाख लोगों ने ऋण ले रखा है। नियमानुसार सभी ऋणधारकों को ऋण की अदायगी ब्याज समेत मासिक किस्त देकर करनी होती है। लगातार 90 दिनों तक बैंकों को रकम अदा न करने पर ऋण खाते को एनपीए (बट्टे खाते) में डाल दिया जाता है। जिले में 15 बैंकों के ऐसे करीब 21,500 हजार कर्जधारकों के खाते एनपीए में डाल दिए गए हैं। बैंकों पर सबसे बड़ी मार कोरोना काल में पड़ी है।
इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि कुल एनपीए खातों में से 18 हजार ऐसे हैं, जिन्हें मार्च 2020 के बाद इस सूची में डाला गया। इनमें बड़ी संख्या में व्यावसायिक ऋण हैं। इसके अलावा काफी संख्या में होम लोन, व्हीकल लोन के ऋण खाते भी बट्टे खाते में चले गए हैं। ऋण और ब्याज की वसूली के लिए बैंकों की ओर से कर्जदारों के दरवाजों पर लगातार दस्तक दी जा रही है, लेकिन हाथ खाली ही बने हुए हैं। कोई कारोबार नहीं चलने की बात कह रहा तो कोई अन्य तरह से बहानेबाजी कर रहा है।
केस -1
कोरोना काल में बंद दुकान नहीं खुल सकी दोबारा
शहर के एक कपड़ा कारोबारी ने साल 2020 में अपना कारोबार शुरू किया। व्यवसाय के लिए उसने बैंक से 25 लाख रुपये का कर्ज लिया। इससे पहले कारोबार जम पाता, कुछ ही महीने बाद कोरोना की पहली लहर ने दस्तक दे दी, जिससे निपटने के लिए सरकार को लॉकडाउन लगाना पड़ा। इससे कारोबार बुरी तरह से टूट गया। लॉकडाउन में बंद दुकान का फिर से ताला नहीं खुलने से कर्ज फंस गया।
केस -2
कमाने वाले सदस्य की मौत से थमी कर्ज अदायगी
आजाद नगर के एक व्यक्ति ने 2019 में घर बनवाने के लिए बैंक से 8 लाख रुपये का कर्ज लिया था, जिसकी वह नियमित रूप से अदायगी भी कर रहा था लेकिन कोरोना की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई। उसके निधन से परिवार के पास आमदनी का कोई जरिया नहीं रहा। इससे जुलाई के बाद से किस्तों की अदायगी नहीं हो पाई, जिससे बैंक ने होम लोन का खाता एनपीए में डाल दिया।
वर्जन-
ऋण की वसूली के लिए कर्जधारकों से बैंक लगातार संपर्क कर रहे हैं। बावजूद, कर्ज की नियमित रूप से अदायगी नहीं हो रही है। लगातार 90 दिनों तक ब्याज व मूल रकम वापस न होने पर खाते एनपीए में डाल दिए गए हैं। वसूली के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
-एमएम प्रसाद, अग्रणी जिला प्रबंधक
