PM Modi in Kedarnath: केदारनाथ त्रासदी को याद कर भावुक हुए प्रधानमंत्री मोदी, कही यह बात
देहरादून, अमृत विचार। केदारनाथ धाम पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2013 में आई आपदा को याद कर भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि बरसों पहले जो नुकसान यहां हुआ था, वो अकल्पनीय था। जो लोग यहां आते थे, वो सोचते थे कि क्या ये हमारा केदार धाम फिर से उठ खड़ा होगा? लेकिन मेरे भीतर की …
देहरादून, अमृत विचार। केदारनाथ धाम पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2013 में आई आपदा को याद कर भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि बरसों पहले जो नुकसान यहां हुआ था, वो अकल्पनीय था। जो लोग यहां आते थे, वो सोचते थे कि क्या ये हमारा केदार धाम फिर से उठ खड़ा होगा? लेकिन मेरे भीतर की आवाज कह रही थी कि ये पहले से अधिक आन-बान-शान के साथ खड़ा होगा। यहां आकर कण-कण से जुड़ जाता हूं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार सुबह करीब 7.55 बजे एमआई हेलीकॉप्टर से केदारनाथ धाम पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करीब 15 मिनट मंदिर के गर्भ गृह में पूजा-अर्चना की और जलाभिषेक किया। प्रधानमंत्री ने आदिगुरु शंकराचार्य समाधि स्थल के पुनर्निर्माण के लोकार्पण और 12 फीट लंबी और 35 टन वजन वाली प्रतिमा का अनावरण भी किया।
दूसरे कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का केदारनाथ धाम का यह पांचवां दौरा है। ऋषिकेश से मंगाए गए 15 क्विंटल फूलों से बाबा केदारनाथ के धाम को भव्य रूप से सजाया गया है। प्रधानमंत्री केदारनाथ में आदि शंकराचार्य की मूर्ति के अनावरण समेत करीब करीब चार सौ करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री को केदारनाथ मंदिर का प्रतीकात्मक स्वरूप और शॉल भेंट किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम का हिमालय और उत्तराखंड से विशेष लगाव है। केदारनाथ का पुनर्निर्माण प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट है। 2013 की आपदा के समय उत्तराखंड की मदद के लिए हाथ बढ़ाया था। जिसके पहले चरण का काम पूरा हो चुका है और दूसरे चरण के कार्य हो रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘जय बाबा केदार’ के जयकारों के साथ संबोधन शुरू किया। उन्होंने कहा कि शंकर का संस्कृत में अर्थ ‘शं करोति सः शंकरः’ यानी, जो कल्याण करे, वही शंकर है। इस व्याकरण को भी आचार्य शंकर ने प्रत्यक्ष प्रमाणित किया। उनका पूरा जीवन जितना असाधारण था, उतना ही वह जन साधारण के कल्याण के लिए समर्पित थे। आदि शंकराचार्य का जीवन भारत और विश्व कल्याण के लिए था। एक समय था जब आध्यात्म को, धर्म को केवल रूढ़ियों से जोड़कर देखा जाने लगा था। लेकिन, भारतीय दर्शन तो मानव कल्याण की बात करता है, जीवन को पूर्णता के साथ समग्र तरीके में देखता है। आदि शंकराचार्य ने समाज को इस सत्य से परिचित कराने का काम किया है।
