बरेली: 30 अरब खर्च होने के बावजूद हाईवे पर खतरे का सफर

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बरेली, अमृत विचार। देश की दो प्रमुख राजधानी को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर बरेली-सीतापुर के करीब 157 किलोमीटर लंबे हिस्से को ठीक करने के लिए 10 साल में करीब 30 अरब रुपये का मोटा बजट खर्च किया जा चुका है। इसके बावजूद इस हाईवे पर जगह-जगह जानलेवा गड्ढे और अधूरे पुलों की वजह से …

बरेली, अमृत विचार। देश की दो प्रमुख राजधानी को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर बरेली-सीतापुर के करीब 157 किलोमीटर लंबे हिस्से को ठीक करने के लिए 10 साल में करीब 30 अरब रुपये का मोटा बजट खर्च किया जा चुका है। इसके बावजूद इस हाईवे पर जगह-जगह जानलेवा गड्ढे और अधूरे पुलों की वजह से रोजाना गुजरने वाले अनगिनत वाहन चालकों को कोई राहत नहीं मिल रही है। इतना ही नहीं खस्ताहाल हाईवे पर आए दिन हादसे होने से अब तक बड़ी संख्या में लोगों को अपनी जान तक गंवानी पड़ चुकी है लेकिन नेशनल हाईवे अथॉरिटी आफ इंडिया (एनएचएआई) के अधिकारियों की सेहत कोई असर पड़ता नहीं दिखाई दे रहा है।

बरेली-सीतापुर के बीच टूटती-दरकती रोड और आधे-अधूरे फ्लाईओवर व रेलवे ओवरब्रिज की वजह से इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर सफर करना काफी खतरनाक साबित हो रहा है। वर्ष 2010 में करीब 157 किलोमीटर के हाईवे के हिस्से के निर्माण के लिए करीब 2100 करोड़ का ठेका लेने वाली इरा इंफ्रा स्ट्रक्चर नाम की कंपनी करीब तीन साल पहले काम अधूरा छोड़कर भाग गई।

मरम्मत न होने से इस महत्वपूर्ण हाईवे पर बड़े-बड़े खड्ड हो गए थे। कटरा, फतेहगंज पूर्वी सहित कई जगहों पर आधे-अधूरे फ्लाईओवर बड़ा खतरा बन चुके हैं। इसके बाद करीब तीन साल पहले एनएचएआई ने एक कंपनी को करीब 700 करोड़ का ठेका काम पूरा करने के लिए दिया था, लेकिन काम पूरा नहीं हुआ। फरीदपुर टोल प्लाजा के पास करीब ढाई साल पहले उत्तराखंड के एक मंत्री के बेटे की जान चली गई थी। वाहनों के टकराने और पलटने की घटनाएं खस्ताहाल हाईवे की वजह से नहीं रुक पा रही हैं।

ठेका कंपनी पर केस दर्ज हुआ पर बड़ी कार्रवाई कोई नहीं
इस हाईवे का अधूरा प्रोजेक्ट छोड़ने वाली इरा इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी पर वर्ष 2018 में फरीदपुर में एनएचएआई केस भी दर्ज करा चुका है। कंपनी ने हाईवे के साथ फ्लाईओवर व ओवरब्रिज बनाने के नाम पर मोटी रकम खर्च की और निर्माण कार्यों में घपलेबाजी करके लापता हो गई। एनएचएआई और पुलिस ने केवल रिपोर्ट दर्ज कराकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली लेकिन इसमें रकम की वसूली की कार्रवाई अब तक नहीं हो सकी है। इससे सरकार को मोटी रकम की चपत लग गई है।

अनेकों बार लिखा-पढ़ी का भी नहीं पड़ा असर
इस हाईवे का निर्माण कार्य पूरा करने के लिए उच्च प्रशासनिक अधिकारियों की फटकार और एनएचएआई मुख्यालय तक हुई लिखा-पढ़ी का कोई असर नहीं दिखाई दिया। पूर्व में तैनात रहे मंडलायुक्त रणवीर प्रसाद ने इस हाईवे का निर्माण कार्य पूरा कराने को लेकर काफी दिलचस्पी दिखाई थी लेकिन इसका कोई असर एनएचएआई पर नहीं पड़ा। इस वजह से यह हाईवे अब तक पूरी तरह से दुरुस्त नहीं हो सका है।

संबंधित समाचार