रायबरेलीः डेंगू का बढ़ रहा प्रकोप, इलाज के दौरान युवक की मौत
रायबरेली। जिले में डेंगू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। ऊंचाहार के पुरवार सवैया में डेंगू से बीमार युवक की लखनऊ के निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना से घर में कोहराम मचा हुआ है। जिले में डेंगू बुखार बढ़ता जा रहा है। अधिकतर लोग लापरवाही के कारण जिन जोखिम …
रायबरेली। जिले में डेंगू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। ऊंचाहार के पुरवार सवैया में डेंगू से बीमार युवक की लखनऊ के निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना से घर में कोहराम मचा हुआ है। जिले में डेंगू बुखार बढ़ता जा रहा है। अधिकतर लोग लापरवाही के कारण जिन जोखिम में डाल रहे है। जिले में पिछले तीन माह से डेंगू का प्रकोप फैला हुआ है। अब तक 55 मरीज डेंगू के मिल चुके हैं वहीं ऊंचाहार के पुरवार सवैया निवासी 23 वर्षीय युवक की डेंगू ने जान ले ली है।
युवक आईटीआई कॉलेज का छात्र था। गांव निवासी अजीत कुमार अग्रहरि खोजनपुर आईटीआई कॉलेज में इलेक्ट्रीशियन व्यवसाय की पढ़ाई कर रहा था। बीते शनिवार को अजीय कुमार की अचानक तबीयत बिगड़ गई। जिसके चलते परिजनों ने उसे जिला मुख्यालय के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां जांच में डेंगू के लक्षण के साथ प्लेटलेट्स 31 हजार पाई गई। जिसके बाद आनन-फानन में डॉक्टरों ने उसे पीजीआई कॉलेज लखनऊ रेफर कर दिया।

वहां भी जांच में डेंगू उच्च लेवल का होने के साथ-साथ प्लेटलेट्स 15 हजार हो चुकी थी। जिसके बाद डॉक्टरों ने लखनऊ के ही एक निजी हॉस्पिटल में रेफर कर दिया। जहां इलाज के दौरान मंगलवार की देर रात अजीत कुमार की मौत हो गई। मौत की सूचना पर घर में कोहराम मच गया। सीएचसी अधीक्षक डा एमके शर्मा ने बताया कि तहसील क्षेत्र में डेंगू का यह पहला मरीज था। जिसे बचाया नहीं जा सका। टीम भेजकर परिजनों की भी जांच कराई जाएगी।
डेंगू के लक्षण
- मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
- शरीर पर पड़ने वाले लाल निशान जो थोड़े समय बाद ठीक होने के बाद पुनः वापस भी आ जाते हैं
- तेज बुखार
- बहुत तेज़ सिर दर्द
- आंखों के पीछे दर्द
- उल्टी आना और चक्कर महसूस होना
बचाव
- सोते समय मच्छरदानी का उपयोग
- रैपलेंट का प्रयोग
- फुल आस्तीन के कपड़े पहनना
- कूलर से पानी को हटा देना
- कहीं भी पानी का जमाव न होने देना
नगर निकायों में नहीं हो रही फागिंग
जिले में नगर पंचायत हो या फिर नगर पालिका कहीं फर भी फागिंग नहीं होती है। जब डेंगू के किसी मरीज की पहचान होती है तो फागिंग करा दी जाती है। उसके बाद सब ठंडे बस्ते में चला जाता है। नगर हो या शहर सब जगह गंदगी से बुरा हाल है लेकिन निकाय प्रशासन इससे मुंह फेरे हुए है।
