माता अन्नपूर्णा की पुनर्स्थापना यात्रा अयोध्या से हुई रवाना

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Edited By Amrit Vichar
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अयोध्या। अन्नपूर्णा माता की पुनर्स्थापना यात्रा रविवार सुबह करीब 4 बजे गाजे-बाजे के साथ राम जन्मभूमि परिसर पहुंची। माता के दर्शन के लिए लोगों में खासा उत्साह देखा गया। इससे पहले जनपद की सीमा में पहुचते ही जगह-जगह पर यात्रा का स्वागत हुआ। सुबह 10 बजे के करीब यात्रा प्रदेश के पर्यटन मंत्री की अगुवाई …

अयोध्या। अन्नपूर्णा माता की पुनर्स्थापना यात्रा रविवार सुबह करीब 4 बजे गाजे-बाजे के साथ राम जन्मभूमि परिसर पहुंची। माता के दर्शन के लिए लोगों में खासा उत्साह देखा गया। इससे पहले जनपद की सीमा में पहुचते ही जगह-जगह पर यात्रा का स्वागत हुआ। सुबह 10 बजे के करीब यात्रा प्रदेश के पर्यटन मंत्री की अगुवाई में वाराणसी के लिए निकल गई। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था की खास प्रबंध देखे गए।

शनिवार की देर रात माता अन्नपूर्णा की पुनर्स्थापना यात्रा जनपद की सीमा के रूदौली में प्रवेश की। जहां विधायक रामचंद्र यादव ने यात्रा का स्वागत किया। इसके बाद सोहावल और फिर शहर की सीमा में करीब सवा तीन बजे यात्रा ने प्रवेश किया। सहादतगंज में सांसद पुत्र विकास सिंह की अगुवाई में यात्रा का स्वागत किया गया। इसके बाद स्वागत का दौर शुरू हो गया और सुबह तक जारी रहा।

इस दौरान मेयर ऋषिकेष उपाध्याय, विधायक वेद गुप्ता, भाजपा महानगर अध्यक्ष अभिषेक मिश्रा सहित बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारियों ने मां अन्नपूर्णा का पूजन कर आशीर्वाद लिया। यात्रा सुबह 4:30 बजे राम जन्मभूमि परिसर में पहुंची। सुबह मंत्रोच्चारण के बीच माता जी की पूजा हुई। सुबह सवा 10 बजे के करीब मां अन्नपूर्णा जी की शोभा यात्रा श्री राम जन्मभूमि परिसर से  निकली। यह यात्रा शहर से होते हुए सुल्तानपुर के लिए प्रदेश के पर्यटन व जनपद के प्रभारी मंत्री डॉ नीलकंठ तिवारी की अगुवाई में रवाना हो गई। यह यात्रा सोमवार को वाराणसी पहुंचेगी। इस अवसर पर जिलाधिकारी नीतीश कुमार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शैलेश पांडेय, राम मंदिर के मुख्य पुजारी सत्येंद्र व अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

मां अन्नपूर्णा जी की मूर्ति कनाडा सरकार से नई दिल्ली को 9 नवंबर को मिली थी। लगभग 100 साल पहले वाराणसी के घाट से गायब माता अन्नपूर्णा देवी की मूर्ति को कनाडा की रेजिना यूनिवर्सिटी से केन्द्र सरकार के प्रयास से भारत आई। इस मूर्ति की स्थापना काशी कोरिडोर के नवनिर्मित काशी विश्वनाथ धाम के नवीन परिसर/अन्नपूर्णा मंदिर के पास की जायेगी। मूर्ति की विशेषता यह है कि मूर्ति के एक हाथ में कटोरी में खीर और दूसरे हाथ में अन्न है और अन्नपूर्णा जी स्वयं पार्वती जी का एक प्रतिरूप हैं।

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