बरेली: 99 साल की लीज पर दी शहामतगंज रेलवे मालगोदाम की जमीन

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बरेली, अमृत विचार। शाहमतगंज मालगोदाम और उसके आसपास की जमीन सालों से बेकार पड़ी थी। पूर्वोत्तर रेलवे को इससे किसी प्रकार का मुनाफा नहीं हो रहा था। सात साल पहले 36 एकड़ में फैली इस जमीन को रेल भूमि विकास प्राधिकरण को हस्तानांतरित कर दिया गया था जिसके बाद से लगातार यहां विकास की संभावनाएं …

बरेली, अमृत विचार। शाहमतगंज मालगोदाम और उसके आसपास की जमीन सालों से बेकार पड़ी थी। पूर्वोत्तर रेलवे को इससे किसी प्रकार का मुनाफा नहीं हो रहा था। सात साल पहले 36 एकड़ में फैली इस जमीन को रेल भूमि विकास प्राधिकरण को हस्तानांतरित कर दिया गया था जिसके बाद से लगातार यहां विकास की संभावनाएं तलाशी जा रही थीं। आखिरकार इंतजार खत्म हुआ और आरएलडीए द्वारा भूमि को 99 साल की लीज पर दे दिया गया है। जिसके बाद आवासीय योजना के जरिए इस भूमि को विकसित किया जाएगा। आरएलडीए ने चार लोगों के कंसोर्टियम को यह लीज प्रदान की है।

रेल भूमि विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक प्राधिकरण द्वारा ग्लोबाल बिडिंग निकाली गई थी। जिसमें चार लोगों के कंसोर्टियम को 99 साल की लीज पर यह जमीन दी गई है। भुगतान होने के बाद चयनित बिडर को भूमि सौंप दी जाएगी। अक्टूबर के अंत में ही बिडिंग फाइनल की गई थी। करीब 120 दिन की यह पूरी प्रक्रिया होती है। अधिकारियों के मुताबिक रेलवे ट्रैक मिलाकर करीब 36 एकड़ भूमि है। भूमि के कर्मशियल डेवलपमेंट में आवासीय योजना को प्राथमिकता पर रखा गया है। लीज की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यहां निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।

बता दें कि मुख्य शहर के बीचों-बीच मीटरगेज रेलवे ट्रैक करीब चार किलोमीटर लंबा है। तीस साल से यह रेल लाइन बेकार पड़ी है। हालांकि कुछ साल पहले तक मालगाड़ी के जरिए यहां टिंबर कारोबारियों के लिए लकड़ियां ढोकर लाई जाती थीं लेकिन बाद में मालगाड़ी को भी बंद कर दिया गया। अब लीज पर दिए जाने के बाद खाली पड़ी इस जमीन पर अगर आवासीय योजना विकसित होती है तो जाहिर है आसपास दूसरे विकास कार्यों को भी बल मिलेगा वहीं सालों से बेकार पड़ी जमीन से रेलवे को भी आर्थिक मुनाफा होगा।

बाबूगाड़ी से चलता था रेलवे का स्टाफ
नई पीढ़ी ने तो इस भूमि पर केवल अतिक्रमण और भैंसों को टहलते ही देखा होगा। मगर पुराने लोग बताते हैं कि किसी जमाने में यहां मालगाड़ी के अलावा बाबूगाड़ी चला करती थी। यह खास ट्रेन रेलवे के स्टाफ को लाने ले जाने का काम करती थी। ट्रेन के करीब पांच स्टापेज हुआ करते थे। जो शाहमतगंज मालगोदाम से चलकर रेल कारखाना तक जाती थी।

खाली पड़ी जमीन पर किया अतिक्रमण
रेलवे की खाली जमीन पर सालों से लोगों ने अतिक्रमण किया हुआ है। मौजूदा वक्त में जानवर बांधने से लेकर व्यवसायिक गतिविधियां अवैध अतिक्रमण कर की जाती हैं। जमीन पर खुलेआम भवन निर्माण की सामग्री बेची जाती है, आरपीएफ द्वारा कई बार यहां से अतिक्रमण हटवाया गया लेकिन अतिक्रमणकारी बाज नहीं आए। रेता बजरी, ईंटे आदि अवैध रूप से रखकर बेची जाती है।

पूर्व में आरपीएफ और रेल अधिकारियों द्वारा यहां बड़ा अतिक्रमण अभियान चलाया गया था। लोगों ने रेलवे की जमीन पर काफी बाहर तक भवनों का निर्माण कर लिया गया था जिसे हटाया गया था। इसको लेकर काफी हंगामा भी हुआ था। लेकिन भारी विरोध के चलते रेलवे को अतिक्रमण हटाने का अपना अभियान बंद करना पड़ा।

सालों से यह भूमि रेलवे के इस्तेमाल में नहीं आ रही थी। अब जमीन को चार लोगों के कंसोर्टियम को 99 साल की लीज पर दिया गया है। इस जमीन को कंसोर्टियम द्वारा विकसित किया जाएगा। -सुधीर कुमार सिंह, चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर, आरएलडीए

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