बरेली: टैक्स संशोधन के मामलों के शासन ने निगम से मांगे रिकार्ड
बरेली, अमृत विचार। टैक्स निर्धारण में गड़बड़ी के मामलों के बीच यह भी सामने आया है कि कर निर्धारण में तमाम आपत्तियों का या तो निस्तारण ही नहीं किया गया या फिर उन्हें गुपचुप तरीके से गायब कर दिया गया है। इससे इन प्रकरणों में गड़बड़ी की आशंका से भी इंकार नहीं कया जा सकता …
बरेली, अमृत विचार। टैक्स निर्धारण में गड़बड़ी के मामलों के बीच यह भी सामने आया है कि कर निर्धारण में तमाम आपत्तियों का या तो निस्तारण ही नहीं किया गया या फिर उन्हें गुपचुप तरीके से गायब कर दिया गया है। इससे इन प्रकरणों में गड़बड़ी की आशंका से भी इंकार नहीं कया जा सकता है। यह मामले शासन तक पहुंचने के बाद अब संबंधित पत्रावलियों को तलब होने से हड़कंप मचा हुआ है। शासन ने नगर निगम से वर्तमान वित्तीय वर्ष की अब तक के टैक्स संशोधन की फाइलों को तलब किया है।
नगर निगम सीमा में हुए जीआईएस सर्वे में दो लाख से ज्यादा भवनों की संख्या सामने आई है, जबकि नगर निगम अभिलेखों में भवनों की संख्या केवल डेढ़ लाख ही दर्ज है। इतना ही नहीं सर्वे में पचास फीसदी से अधिक संपत्तियों के गृहकर में गड़बड़ी निकली है। इस पर सुनवाई के बाद नए टैक्स को सॉफ्टवेयर पर फीड करना था लेकिन इसमें गड़बड़ी हो गई। बताते हैं कि टैक्स बिलों को घटा दिया और कुछ फाइलें गायब तक हो गई हैं। बिना ऐसा किए मिलीभगत से सॉफ्टवेयर पर टैक्स की फीडिंग भी की जा रही है।
इस मामले में शासन ने पूरे एक साल का रिकॉर्ड मांगा है। नगर विकास विभाग के सचिव अनुराग यादव ने नगर आयुक्त अभिषेक आनंद को एक पत्र भेजा है। जिसमें कहा गया है कि 1 अप्रैल 2020 से 15 अक्टूबर 2021 तक भवनों के संपत्ति कर में धारा 213 के अधीन किए गए संशोधन के परिणाम स्वरूप नगर निगम द्वारा लगाए गए पूर्व के संपत्ति कर में कमी करते हुए संशोधित कर निर्धारण किए जाने वाले तमाम पत्रावली प्रारूप के रूप में भेजें। इस संबंध में अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह का कहना है कि शासन ने एक साल में टैक्स संशोधन मामले की रिपोर्ट मांगी है।
व्यावसायिक कॉम्लेक्स को लेकर सामने आ चुकी गड़बड़ी
शील चौराहे पर आवास विकास परिषद के बने व्यावसायिक कॉम्लेक्स में बनीं दुकानों के कर निर्धारण को लेकर भी सवाल खड़े हो चुके हैं। कुछ दिन पहले इस कॉम्लेक्स के आवंटियों ने शिकायत की थी कि उनकी दुकानों के कर का निर्धारण मनमाने तरीके से कर दिया गया था। इसके अलावा वर्ष 2014 के बाद कई साल तक टैक्स जमा करने के लिए नोटिस ही जारी नहीं हुए थे।
