सतत प्रयास से मिल सकती है मनचाही मंजिल: पुलिस महानिदेशक
आजमगढ़। प्राथमिक शिक्षा की मजबूती पर जोर देते हुये गोवा के पुलिस महानिदेशक इंद्रदेव शुक्ला ने कहा कि नैतिक मूल्यों को आधार बनाकर लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयत्न करने से जीवन की प्रत्येक क्षेत्र में सफल हुआ जा सकता है। आजमगढ़ जिले के मूल निवासी शुक्ला ने शनिवार को कहा कि नैतिक मूल्य …
आजमगढ़। प्राथमिक शिक्षा की मजबूती पर जोर देते हुये गोवा के पुलिस महानिदेशक इंद्रदेव शुक्ला ने कहा कि नैतिक मूल्यों को आधार बनाकर लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयत्न करने से जीवन की प्रत्येक क्षेत्र में सफल हुआ जा सकता है। आजमगढ़ जिले के मूल निवासी शुक्ला ने शनिवार को कहा कि नैतिक मूल्य का आधार प्राइमरी शिक्षा ही है। अब तो बहुत अच्छी तकनीक आ गई है। सब के पास इंटरनेट है,यूट्यूब है, सब माध्यम है।
यदि युवा अपने उद्देश्य और दिमाग को एक निर्धारित लक्ष्य पर रखें और मेहनत करें तो तमाम अभाव के बावजूद भी कामयाबी उसके कदम चूमेगी। साथ ही फोन पर विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि आज पढ़ाई पर सभी लोग जोर दे रहे हैं, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद अभी भी कुछ लोगों के अंदर नैतिकता का घोर अभाव है। इस पर अभिभावकों व शिक्षकों को खास ध्यान देना होगा। नैतिक मूल्य को मजबूत करने के लिए प्राइमरी शिक्षा पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है। क्योंकि नैतिक मूल्य का आधार प्राइमरी शिक्षा ही है। वहीं, 1995 बैच के आईपीएस, आजमगढ़ जिले की कप्तानगंज थाना क्षेत्र के मल्लूपुर गांव के मूलनिवासी इंद्र देव शुक्ला की प्रारंभिक शिक्षा गांव में स्थित उस प्राइमरी स्कूल में हुई जो उस जमाने में मंडई में चलता।
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कप्तानगंज में कक्षा 6 की पढ़ाई करने के बाद कक्षा 7 से 8 तक गढ़ कौशिक के जूनियर हाई स्कूल में शिक्षा ग्रहण की। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की शिक्षा उनकी कप्तानगंज बाजार स्थित तेरही के इंटर कॉलेज से हुई। इसके बाद उन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित कर इलाहाबाद विश्वविद्यालय का रुख किया और बीएससी की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास की।
इसके बाद उन्होंने एमएससी फिजिक्स स्पेसलाइजेशन इन इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ डिग्री भी हासिल की और फिर सिविल सेवा की परीक्षा में सम्मिलित हुए। पहली बार की परीक्षा में प्री-एग्जाम क्वालीफाई किये, लेकिन दूसरी बार की परीक्षा में पास नहीं हुए। बावजूद इसके उन्होंने अपना हौसला बनाए रखा। दूसरी बार फिर सिविल सेवा की परीक्षा दी और 1995 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में उनका चयन हो गया और गोवा पुलिस सर्विस ज्वॉइन किया।
