लखनऊ: गंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माण को पर्यावरण मंत्रालय ने दी मंजूरी
लखनऊ। गंगा एक्सप्रेस वे के निर्माण का रास्ता अब साफ हो गया है। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय भारत सरकार ने भी शनिवार को इसकी मंजूरी दे दी है। इस निर्माण कार्य के लिए तकरीबन 94 फीसदी भूमि अधिगृहीत भी की जा चुकी है। निर्माण कार्य शुरू करने के लिए जल्द ही टेंडर संबंधी प्रक्रियां भी …
लखनऊ। गंगा एक्सप्रेस वे के निर्माण का रास्ता अब साफ हो गया है। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय भारत सरकार ने भी शनिवार को इसकी मंजूरी दे दी है। इस निर्माण कार्य के लिए तकरीबन 94 फीसदी भूमि अधिगृहीत भी की जा चुकी है। निर्माण कार्य शुरू करने के लिए जल्द ही टेंडर संबंधी प्रक्रियां भी पूरी की जाएगी, जिससे समय से कार्य शुरू हो सके।
प्रदेश सरकार की परियोजना गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए शनिवार को राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन अथॉरिटी, उप्र के सदस्य सचिव ने पर्यावरणीय मंजूरी जारी कर दी है। बताते चले कि पर्यावरण एवं वन मंत्रालय भारत सरकार की अधिसूचना-2006 के अंतर्गत शेड्यूल में आच्छादित इस प्रोजेक्ट के निर्माण से पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त करना जरूरी होता है। इसी अधिसूचना के तहत यूपीडा ने गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए पर्यावरणीय मंजूरी ली है। इस एक्सप्रेसवे परियोजना की कुल अनुमानित लागत 36230 करोड़ रुपए है।
यह एक्सप्रेसवे 594 किमी. लम्बा है जो मेरठ, बुलंदशहर मार्ग पर जनपद मेरठ के बिजौली ग्राम के समीप से शुरू होकर प्रयागराज बाइपास पर जनपद प्रयागराज के जुडापुर दादू ग्राम के समीप खत्म होगा। यह एक्सप्रेसवे 12 जनपद मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, सम्भल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ एवं प्रयागराज से होकर गुजरेगा। यह एक्सप्रेसवे छह लेन चौड़ा होगा। इस एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य चल रहा है। अब तक लगभग 94 प्रतिशत भूमि अधिगृहीत की जा चुकी है। इस एक्सप्रेसवे परियोजना के निर्माण से लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
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