प्रदेश में मजबूत किया स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा : मुख्यमंत्री योगी
लखनऊ। लोक सेवा आयोग से चयनित 1200 विशेषज्ञ चिकित्सकों में से 310 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लोकभवन में नियुक्ति पत्र सौंपे। इस दौरान उन्होंने कोरोना की आरटीपीसीआर जांच में तेजी लाने के लिए 15 जिलों में बीएसएल-2 प्रयोगशालाओं का लोकार्पण भी किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उनकी सरकार …
लखनऊ। लोक सेवा आयोग से चयनित 1200 विशेषज्ञ चिकित्सकों में से 310 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लोकभवन में नियुक्ति पत्र सौंपे। इस दौरान उन्होंने कोरोना की आरटीपीसीआर जांच में तेजी लाने के लिए 15 जिलों में बीएसएल-2 प्रयोगशालाओं का लोकार्पण भी किया।
इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उनकी सरकार ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा मजबूत करने के लिए हर संभव कदम उठाए हैं। कोरोना काल के आरंभिक दौर में 36 जिलों के सरकारी अस्पतालों में आईसीयू बेड तक नहीं थे। अब सभी जिलों में ये इंतजाम हैं। चार माह में विभिन्न जिलों में 518 ऑक्सीजन प्लांट लग गए। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को देखते हुए नियमावली में संशोधन भी किया। ताकि उन्हें सम्मानजनक तैनाती और एक ग्रेड अधिक दिया जा सके। उन्होंने कहा कि इससे अब ग्रामीण अंचलों के अस्पतालों में भी विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं मिल सकेंगी।
उन्होंने चिकित्सकों को सेवा की प्रेरणा देते हुए कहा कि आपका सरोकार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति से होगा। आपको उन्हें निराश नहीं करना है। आप जितने मरीज देखेंगे उतना ही अनुभव वृहद होगा। इस अनुभव को रिसर्च पेपर के रूप में प्रकाशित भी किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका, ब्रिटेन और चीन समेत कई देश कोरोना की तीसरी लहर से प्रभावित हैं, लेकिन प्रदेश में फिलहाल ऐसी आशंका नहीं है। फिर भी सावधानी जरूरी है।कहा कि प्रदेश को चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाकर मेडिकल हब बनाने की दिशा में काम हो रहा है। इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह, राज्य मंत्री अतुल गर्ग, मुख्य सचिव आरके तिवारी आदि वरिष्ठ अधिकारीगण भी मौजूद थे।
इन जिलों में बनीं प्रयोगशालाएं
अमरोहा, बागपत, भदोही, चन्दौली, हमीरपुर, हापुड़, हरदोई, मुजफ्फरनगर, शामली, सुल्तानपुर, संतकबीरनगर, रामपुर, सम्भल, पीलीभीत तथा फर्रुखाबाद।
इन विशेषज्ञों की कमी होगी दूर
आयोग से नए चुने गए विशेषज्ञ चिकित्सकों में फिजिशियन, रेडियोलॉजिस्ट, ईएनटी, ऑर्थाेपेडिक्स, पैथालॉजिस्ट, गायनकोलॉजिस्ट, पेडिट्रिशियन आदि शामिल हैं। 1200 विशेषज्ञों की तैनाती से खासकर ग्रामीण अस्पतालों में विशेषज्ञों की कमी दूर होगी।
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