बरेली: वृक्ष का रूप लेने लगे मंझा में ट्रांसलोकेट पेड़
बरेली, अमृत विचार। जिस तेजी से पेड़ों को ट्रांसलोकेट किया जा रहा है उससे शहर के पर्यावरण को लेकर लोगों में चिंता बढ़ने लगी है। स्मार्ट सिटी के नाम पर पेड़ों को शहर से हटाना लोगों को रास नहीं आ रहा है। कई सड़कों से छायादार वृक्ष हटाकर बीते दिनों शहर से बाहर ट्रांसलोकेट कर …
बरेली, अमृत विचार। जिस तेजी से पेड़ों को ट्रांसलोकेट किया जा रहा है उससे शहर के पर्यावरण को लेकर लोगों में चिंता बढ़ने लगी है। स्मार्ट सिटी के नाम पर पेड़ों को शहर से हटाना लोगों को रास नहीं आ रहा है। कई सड़कों से छायादार वृक्ष हटाकर बीते दिनों शहर से बाहर ट्रांसलोकेट कर दिए गए।
ट्रांसलोकेट किए गए पेड़ों के जीवित रहने को लेकर भी लोग आशंकित थे मगर अब उम्मीद की किरन फूटने लगी है। डोहरा रोड से मंझा ग्राम्य वन में ट्रांसलोकेट किए गए अधिकांश पेड़ एक बार फिर वृक्ष का रूप लेने लगे हैं तो दूसरी तरफ हाल में कान्हा उपवन में ट्रांसलोकेट किए गए पेड़ों के अंदर नई कलियां आने लगीं हैं।
बता दें कि बीडीए की रामगंगानगर आवासीय योजना को जाने वाली डोहरा रोड के चौड़ीकरण के आड़े आ रहे करीब 650 पेड़ों को पांच महीने पहले ग्राम्य वन मंझा में ट्रांसलोकेट किया गया था। शहर में ऐसा पहली बार हुआ था कि एक जगह से हटाकर विशालकाय पेड़ किसी दूसरे स्थान पर ट्रांसलोकेट किए गए। प्रदेश में पहली बार पेड़ ट्रांसलोकेट किए जा रहे थे तो लोग भी आशंकित थे कि यह पेड़ जीवित भी रहेंगे या नहीं क्योंकि ट्रांसलोकेट करने की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि इनमें अधिकांश पेड़ों के जीवित रहने की संभावना कम रहती है। मुश्किल इसलिए भी था क्योंकि यह काम विशेषज्ञों की टीम नहीं कर रही थी।
एक विशालकाय पेड़ की शाखाओं की छंटनी करने के बाद शहर से कई किलोमीटर ले जाने में वन विभाग के भी पसीने छूट गए थे मगर जिस उद्देश्य से इन पेड़ों को ट्रांसलोकेट किया गया था वह पूरा होता दिख रहा है। करीब 650 में से 350 पेड़ ऐसे हैं जो एक बार फिर वृक्ष का रूप ले रहे हैं। इनमें काफी घनी पत्तियां आने लगी हैं।
इसके अलावा शहर की करीब आधा दर्जन सड़कों से अब तक 350 के आसपास पेड़ों को सीबीगंज के कान्हा उपवन और शाहजहांपुर रोड स्थित सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के पास ट्रांसलोकेट किया जा चुका है। कन्हा उपवन में ट्रांसलोकेट किए गए पेड़ों में नई कलियां फूटने लगी हैं।
पेड़ को ट्रांसलोकेट करने के लिए पहले कटिंग करनी पड़ती है, उनकी जड़ों को छोटा करने के साथ पेड़ों को डीहाइड्रेशन से बचाया जाता है, इसके बाद ट्रांसलोकेट करने वाले स्थान पर ले जाते हैं। यह बेहद जटिल प्रक्रिया है लेकिन अब मेहनत सफल होती दिखाई दे रही है। मंझा में यह वृक्ष का रूप ले रहे हैं। कान्हा उपवन में ट्रांसलोकेट किए गए पेड़ों पर भी नई पत्तियां आ रही हैं। -वैभव चौधरी, सदर वन रेंजर
