रामपुर : शहर के पास माफिया ने हरियाली पर चलाई कुल्हाड़ी, सोते रहे अफसर
रामपुर, अमृतच विचार। स्वार रोड पर इमरता गांव के पास मुरसैना पुलिस चौकी से मात्र तीन किलोमीटर की दूरी पर वन माफिया ने आम के 157 पेड़ों के बाग को काट डाला। करीब 50 बीघा बाग की इस हरियाली पर 15 दिन से माफिया कुल्हाड़ी चलाते रहे। लेकिन न पुलिस को पता चला न वन …
रामपुर, अमृतच विचार। स्वार रोड पर इमरता गांव के पास मुरसैना पुलिस चौकी से मात्र तीन किलोमीटर की दूरी पर वन माफिया ने आम के 157 पेड़ों के बाग को काट डाला। करीब 50 बीघा बाग की इस हरियाली पर 15 दिन से माफिया कुल्हाड़ी चलाते रहे। लेकिन न पुलिस को पता चला न वन विभाग की टीम को भनक लगी। जब पेड़ कटने का काम पूरा हो गया, एक-एक पेड़ कटकर उठ गया और लकड़ी भी लदकर चली गई तब पुलिस ने खानापूर्ति करके वन विभाग के बीट प्रभारी से तहरीर लेकर बाग मालिक डा. सतेंद्र के खिलाफ केस दर्ज करा दिया। वहीं इस मामले में एक ठेकेदार ने बाग मालिक पर भी धोखाधड़ी करके उससे रुपये लेकर दूसरे ठेकेदार से बाग कटवा देने का आरोप लगाया है।

सिविल लाइन थाना क्षेत्र के गांधी समाधि निवासी और मूलता इमरता के रहने वाले डाक्टर सतेंद्र का इमरता में करीब 50 बीघा में आम का बाग है। इस बाग को उन्होंने इरफान अली ठेकेदार को दो साल पहले कटवाने के लिए चार लाख में बेचा था। इरफान बाग काटने के लिए अनुमति लेने के लिए भटकते रहे लेकिन उन्हें अनुमति नहीं मिली। पता चला है कि डा. सतेंद्र ने अन्य किसी वन माफिया से इस बाग को पिछले 15 दिनों से कटवा डाला।
157 आम के हरेभरे पेड़ धराशायी करके हरियाली नष्ट कर दी गई। सड़क या पुल बनाने के लिए जहां एक पेड़ काटने के लिए पर्यावरण मंत्रालय से लेकर तमाम अथारिटी से अनुमति लेनी होती है। जब तक पेड़ नहीं कट जाता पुल और सड़क का निर्माण रुका रहता है, वहीं इन 157 पेड़ों को 15 दिन में काटकर हरियाली नष्ट कर दी गई। मुरसैना पुलिस चौकी से मात्र तीन किमी दूर पुलिस जानबूझकर अनजान बनी रही। वन विभाग के अधिकारी व वन रक्षक अनदेखी करते रहे।
जब सभी पेड़ कटकर ट्रकों में लदकर चले गए तब आज बाग मालिक डा. सतेंद्र के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की खानापूर्ति कर दी गई। वहीं दूसरी ओर इरफान ठेकेदार ने डा. सतेंद्र के खिलाफ धोखाधड़ी करके पेड़ उनसे सौदा करके दूसरे ठेकेदार से कटवा लेने की शिकायत दर्ज कराई है। वहीं डा. सतेंद्र का कहना है कि हमें पता नहीं चला पेड़ कौन काट ले गया। इसकी हमने अजीमनगर थाने में तहरीर दी है। जबकि 15 दिनों तक पेड़ कटते रहे। आसपास के गांव वालों को भी पता है, डा. जानबूझकर अनजान बने हुए हैं। पुलिस और वन विभाग के अफसरों की भूमिका पर भी सवालिया निशान लग रहा है।
पुलिस व वन विभाग ने यह बनाई कहानी
साठगांठ की खातिर पुलिस और वन विभाग ने यह कहानी बना डाली है। मुरसैना चौकी इंचार्ज कमलेंद्र ने दर्ज रिपोर्ट में कहा है कि टीम के साथ वह गश्त कर रहे थे कि इमरता गांव पहुंचने पर कुछ लोग आम के पेड़ काट कर ले जा रहे थे। पुलिस को देखकर मौके से फरार हो गए। बाद में वन विभाग के अधिकारियों को इस मामले से अवगत कराया। जहां सैदनगर के बीट प्रभारी वहां पर पहुंच गए। आम के पेड़ों को कटा देखकर उनके होश उड़ गए। बाद में हेमराज ने अजीमनगर थाने में आरोपी डाक्टर सतेंद्र के खिलाफ तहरीर दी। पुलिस ने डाक्टर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं मौके से एक पेड़ भी बरामद नहीं किया गया है। इससे पुलिस और वन विभाग की भूमिका पर सवालिया निशान लग रहा है।
रक्षक ही बन रहे हैं हरियाली के भक्षक
एक तरफ वन विभाग के जिम्मेदारी अधिकारी 157 आम के पेड़ों को छांटना कह रहे हैं, वहीं मौके पर बाग की अमृत विचार के पास वीडियो फुटेज और मौजूद फोटो इस बात की गवाही दे रहे हैं कि हरियाली को नष्ट कर दिया गया है। जिस तरह से पेड़ काटे गए हैं वह दोबारा हरियाली न पैदा कर सकते हैं और न इनपर फल आने की स्थिति है। आरोप यह है कि वन अफसरों और पुलिस ने मोटी रकम लेकर पूरी प्लानिंग के साथ बाग को कटवाया है। अब पेड़ छांटे जाने के नाम पर जमीन में बची जड़ों को बाद में उखाड़ा जा सकेगा।
एनजीटी में दर्ज कराएंगे मामला
वन संपदा और वन्य जीव बचाने के लिए संघर्ष करने वाले और मेनका गांधी की टीम के सदस्य रवेंद्र शुक्ला एडवोकेट ने बताया कि रामपुर में 157 आम के हरे भरे पेड़ों का बाग पुलिस और वन विभाग की साजिश से काटकर खत्म करने की जानकारी मिली है। वीडियो फुटेज और फोटो इंटरनेट मीडिया से मिले हैं। इस मामले में जल्द मौका मुआयना करके राष्ट्रीय हरित न्यायालय में केस दर्ज कराया जाएगा। वन और पुलिस अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की जाएगी। वहीं हिंदू महासंघ के प्रवक्ता प्रवीन गुर्जर ने कहा कि एक तरफ प्रदूषण फैल रहा है वहीं दूसरी तरफ इस तरह पेड़ों का काटा जाना घातक है। मामले में शिकायत करके सुप्रीम कोर्ट से संज्ञान लेने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
जिले भर में बिना परमीशन पिलिंग मशीनों नाम पर चल रहीं आरा मशीनें
जिले भर में बिना परमीशन के आरा मशीने धड़ल्ले से चल रही हैं, वन विभाग ने पिलिंग मशीनों के नाम पर इन्हें अनुमति दे रखी है। अवैध कारोबार करने वालों ने संगठन भी बना लिया है और अफसरों को मोटी कमाई कराई जा रही है। इसी कारण वन विभाग के अधिकारियों द्वारा इन पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिससे इन लोगों के हौंसले बुंलद हैं। शहर के बिलासपुर गेट और पहाड़ी गेट पर थोड़ी-थोड़ी दूरी-दूरी पर आरा मशीन और पिलिंग मशीनें अवैध रूप से चल रही हैं। सुबह से लेकर शाम तक वहां पर बिना परमीशन के लकड़ी आती रहती है लेकिन वन विभाग और बिजली विभाग के अधिकारी भी इन पर कार्रवाई को लेकर सक्रिय नहीं हैं। अवैध मशीनों पर वैध तरीके से बिजली कनेक्शन दे दिए गए हैं।
माफिया ने पीपली वन को काटकर किया बर्बाद
थाना क्षेत्र के मिलकखानम में स्थित पीपली वन में खैर और शीशम की बहुत कीमती लकड़ी है, लेकिन वन माफिया उसको भी नहीं छोड़ रहे हैं। रात के अंधेरे में खैर, सौगान, शाल, आम शीशम आदि के पेड़ काटकर बेचे जा चुके हैं और लगातार काटे जा रहे हैं, लेकिन वन विभाग द्वारा ऐसे माफियाओं पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इससे उनके हौसले बुंलद हैं पुलिस भी चौराहों से साठगांठ करके लकड़ी से भरे ट्रैक्टर ट्रालियों को वहां से निकलवाती है।
बाग से आम के पेड़ काटने की बात गलत है पेड़ों को बिना परमीशन के छांट दिया गया था। इस मामले में डाक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। आगामी कार्रवाई की जा रही है। राजीव कुमार, डीएफओ
