लखीमपुर-खीरी: संविदा कर्मचारियों की हड़ताल से चरमराई स्वास्थ्य सेवाएं
लखीमपुर-खीरी, अमृत विचार। जिले में संविदा कर्मचारियों की अनिश्चित कालीन हड़ताल चार दिन से चल रही है। इससे जहां स्वास्थ्य विभाग के डाटा फीडिंग और टीकाकरण जैसे कार्य प्रभावित हो रहे है। वहीं इसका असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है। हालांकि शुक्रवार को सीएमओ सहित अन्य अधिकारियों ने वैक्सीनेशन करने के लिए कर्मचारियों …
लखीमपुर-खीरी, अमृत विचार। जिले में संविदा कर्मचारियों की अनिश्चित कालीन हड़ताल चार दिन से चल रही है। इससे जहां स्वास्थ्य विभाग के डाटा फीडिंग और टीकाकरण जैसे कार्य प्रभावित हो रहे है। वहीं इसका असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है। हालांकि शुक्रवार को सीएमओ सहित अन्य अधिकारियों ने वैक्सीनेशन करने के लिए कर्मचारियों से अनुरोध किया लेकिन इसका कर्मचारियों पर कोई असर नही हुआ। यदि यह हड़ताल और खिचती है तो इसका गंभीर असर हो सकता है।
हालांकि सीएमओ ने जल्दी ही कोई हल निकलने की उम्मीद जताई है। आश्वासन के बाद संविदा कर्मचारियों की मांगे पूरी न होने से उनमें रोष है। इसके लेकर संविदा कर्मचारियों ने पहले सांकेतिक विरोध किया इसके बाद वे अनिश्चित कालीन हड़ताल पर उतर आए है। इन कर्मचारियों में स्वास्थ्य विभाग के डाटा आपरेटरों से लेकर तमाम एएनएम और पैरामेडिकल स्टाफ के लोग है। संविदा पर कई डाक्टर भी हैं जो जिला अस्पताल में ओपीडी करते थे लेकिन इनकी हड़ताल के बाद से इस तरह की सेवाएं बाधित है।
हालांकि अभी तक कर्मचारियों ने आपातकालीन सेवाएं नहीं बाधित की है। लेकिन भविष्य में कोराना जैसा संकट भी सामने ही है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग शत प्रतिशत टीकाकरण के लक्ष्य को दिसंबर में ही पूरा करना चाहता है लेकिन यदि संविदा कर्मचारियों की की हड़ताल समाप्त नहीं होती है तो यह लक्ष्य पूरा कर पाना लगभग असंभव हो जाएगा। चौथे दिन हड़ताल के दौरान सीएमओ ऑफिस प्रांगण में उपस्थित संविदा कर्मचारियों ने थाली और ताली बजा कर अपना विरोध जताया। संविदा कर्मचारियों ने इसबात के भी संकेत दिए हैं कि मांगे पूरी नहीं होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
यह हैं संविदा कर्मियों की मुख्य मांगे
संविदा कर्मचारी जिन सात मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं उनमें विनियमितीकरण, समायोजन व असृजित पदों का विभाग में सृजन, वेतन पॉलिसी व वेतन विसंगति, सातवें वेतन आयोग का लाभ व जॉब सिक्योरटी, रिक्त पदों पर गैर जिलों में स्थानान्तरण, आउट सोर्स नीति खत्म किया जाना, बीमा पॉलिसी, आशा बहुओं का नियत मानदेय समय पर दीया जाना शामिल है।
सीएमओ के समझाने का नहीं हुआ कोई असर
कर्मचारियों को समझाने के लिए शुक्रवार को सीएमओ डा शैलेंद्र भटनागर और एसीएमओ डॉ. अनिलकुमार गुप्ता कर्मचारियों के बीच पहुंचे और कर्मचारियों से सेवाओं को बहाल करने की अपील की। इस दौरान सीएमओ डॉ. शैलेंद्र भटनागर ने कहा कि कोरोना का तीसरा वैरीअंट अब देश में आ चुका है। ऐसे में बॉर्डर क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण जिला भी संवेदनशील है। अगर कोरोना वैक्सीनेशन और कोरोना सेंपलिंग को रोका जाएगा तो तीसरे वैरीअंट के आने का खतरा बढ़ जाएगा। ऐसे में भले ही संविदा कर्मचारी हड़ताल जारी रखें परंतु इन दो कार्यों के लिए उन में लगे कर्मचारियों को हड़ताल से मुक्त कर दें। हालांकि कर्मचारियों ने प्रदेश नेतृत्व के फैसले के बिना हड़ताल नहीं समाप्त करने की बात कही है।
जल्दी ही निकलेगा कोई हल
कर्मचारियों की मांगे हैं यह शासन स्तर का मामला है। उन्होंने शुक्रवार को कर्मचारियों से बात की है और वैक्सीनेशन जैसे कार्य करने के लिए कहा है अभी कर्मचारियों ने कुछ नहीं कहा है लेकिन प्रयास चल रहे हैं जल्दी ही कोई हल निकलेगा। स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित नहीं होने दी जाएंगी। -शैलेंद्र भटनागर, सीएमओ
