बरेली: नगर निगम कर्मियों को बोनस तो दूर वेतन तक के लाले
बरेली, अमृत विचार। गृहकर आदि की वसूली फिसड्डी होने से नगर निगम के सामने आर्थिक संकट बढ़ रहा है। ऐसे में नगर निगम प्रशासन के सामने कर्मचारियों को बोनस तो दूर, समय से वेतन देने तक की चुनौती खड़ी हो गई है। वसूली की स्थिति न सुधर पाने से नगर निगम के कर्मचारी काफी समय …
बरेली, अमृत विचार। गृहकर आदि की वसूली फिसड्डी होने से नगर निगम के सामने आर्थिक संकट बढ़ रहा है। ऐसे में नगर निगम प्रशासन के सामने कर्मचारियों को बोनस तो दूर, समय से वेतन देने तक की चुनौती खड़ी हो गई है। वसूली की स्थिति न सुधर पाने से नगर निगम के कर्मचारी काफी समय से इस दिक्कत से जूझ रहे हैं लेकिन इसका कोई समाधान नहीं निकल पा रहा है। बताते हैं कि अस्थायी कर्मचारियों को तो दो-दो महीनों तक तनख्वाह नहीं मिलने से उन्हें घर का खर्च तक चलाना मुश्किल हो गया है।
नगर निगम को हर साल गृहकर, जलकर और सीवर कर से जो राजस्व प्राप्त होता है, उसी से कर्मचारियों को तनख्वाह का वितरण होता है। इस वर्ष वसूली को लेकर स्थिति काफी खराब होने के बावजूद नगर निगम प्रशासन वसूली के लिए कोई अभियान नहीं चला रहा है। नगर निगम प्रशासन करीब 70 से 80 करोड़ रुपये की वसूली करता है।
इस बार ब्याज पर माफी वाले वादों में आकर करदाताओं ने हाउस टैक्स जमा नहीं किया है। 20 से 25 करोड़ रुपये ही टैक्स के रूप में जमा हो पाए है। नगर निगम के पास जितना बजट था वह निर्माण, पेयजल, पथ प्रकाश आदि पर खर्च कर दिया। बजट से ज्यादा पैसा नगर निगम खर्च कर चुका है। निगम के पास पैसे न होने की वजह से कर्मचारियों को बोनस तक नहीं दिया गया है।
इसके खिलाफ नगर निगम कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने मोर्चाबंदी शुरू कर दी है। 9 दिसंबर को कर्मचारी यूनियन के लोग विरोध प्रदर्शन करेंगे। बजट की कमी की वजह से विकास कार्य भी नहीं हो पा रहे हैं। शहर में कच्ची गलियों को पक्का करने का दम जिम्मेदारों ने भरा था लेकिन नगर निगम की आमदनी न होने की वजह से यह विकास के काम अटक गए हैं।
नगर निगम कर्मचारी संघ के महासचिव जयपाल सिंह पटेल ने बताया कि नगर निगम में साढ़े चार हजार से अधिक कर्मचारी हैं। इनमें से बहुत से कर्मचारियों को तनख्वाह तक नहीं मिली है, जबकि बोनस इस बार नहीं दिया गया है। आउट सोर्सिंग के कर्मचारियों को दो माह से वेतन नहीं दिया है। 9 दिसंबर को हम कर्मचारियों के हित में आवाज उठाने जा रहे हैं।
