लखनऊ: स्पॉट काउंसलिंग के बाद भी इंजीनियरिंग की 85 हजार सीटें खाली
लखनऊ। कई राउंड की काउंसलिंग, सीधे प्रवेश, स्पॉट काउंसलिंग के बाद भी प्रदेश भर के इंजीनियरिंग कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में इंजीनियरिंग की 85 हजार से ज्यादा सीटें खाली रह गई हैं। इसका बड़ा कारण यह है कि कोरोनाकाल में जिस तरह से तकनीक व डिजिटलीकरण ने लोगों के जीवन में जगह बनाई है, उसके बाद …
लखनऊ। कई राउंड की काउंसलिंग, सीधे प्रवेश, स्पॉट काउंसलिंग के बाद भी प्रदेश भर के इंजीनियरिंग कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में इंजीनियरिंग की 85 हजार से ज्यादा सीटें खाली रह गई हैं। इसका बड़ा कारण यह है कि कोरोनाकाल में जिस तरह से तकनीक व डिजिटलीकरण ने लोगों के जीवन में जगह बनाई है, उसके बाद कम्प्यूटर साइंस व इन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी को छोड़कर बाकी ब्रांच की ओर छात्रों का रुझान कम हुआ है।
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दाखिलों और खाली रह गई सीटों का ब्योरा देते हुए शुक्रवार को एकेटीयू ने आंकड़े जारी किए हैं। विशेषज्ञों की मानें तो सीटें खाली रह जाने का एक बड़ा कारण यह भी है कि कोविडकाल में फार्मेसी की ओर रुझान बढ़ा है। इस बार एकेटीयू की काउंसलिंग से बीफार्मा में 4019 दाखिले हुए हैं। वहीं लैटरल एंट्री से भी 126 दाखिले लिए गए हैं।
बीटेक में 13345 दाखिले हैं, जिनमें ज्यादातर सीएस व आईटी ब्रांच के हैं। इतनी बड़ी संख्या में खाली सीटें रह जाने का असर कई कॉलेजों पर पड़ेगा। सूत्रों की मानें तो दर्जनों ऐसे कॉलेज हैं जहां इस सत्र में एक भी दाखिला नहीं हुआ है। अब उनके पास या तो सीधे प्रवेश लेने का रास्ता बचा है या फिर सत्र शून्य करने का।
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