अखिलेश को सपा का नाम माफियावादी पार्टी रख लेना चाहिए : ब्रजेश पाठक
लखनऊ। हरिशंकर तिवारी परिवार सहित समाजवादी पार्टी में शामिल होने पर कानून मंत्री ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को सपा का नाम माफियावादी पार्टी रख लेना चाहिए। कानून मंत्री ब्रजेश पाठक ने रविवार को बयान जारी करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के मूल में ही …
लखनऊ। हरिशंकर तिवारी परिवार सहित समाजवादी पार्टी में शामिल होने पर कानून मंत्री ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को सपा का नाम माफियावादी पार्टी रख लेना चाहिए। कानून मंत्री ब्रजेश पाठक ने रविवार को बयान जारी करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के मूल में ही माफियावाद, अराजकतावाद, अपराधवाद और भ्रष्टाचारवाद शामिल है। जो गुण मूल में होते हैं वह बदलते नहीं हैं।
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी अपनी पार्टी की पुरानी परिपाटी के मुताबिक अपराधी और माफिया को ही पसंद कर रहे हैं। जारी बयान में कानून मंत्री ने कहा कि हरिशंकर तिवारी और उनके कुनबे के इतिहास और कारनामों से जनता भली-भांति वाकिफ है। पूर्वांचल में इस परिवार के आवास को जिस हाता के नाम से जाना जाता है, उसे लोग अपराध की नर्सरी भी समझते रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के पहले तक यह परिवार गोरखपुर और आसपास के जिलों में सत्ता संरक्षित अपराध उद्योग का बोर्ड ऑफ डायरेक्टर हुआ करता था। सरकारी ठेकों में हस्तक्षेप से कमाई भी इनका धंधा था।
योगी सरकार में अन्य माफिया की तरह अब इनकी भी हेकड़ी गुम है। पूर्व में इस कुनबे की तरफ से किए गए एक बड़े बैंक घोटाले का खुलासा इसी सरकार में हुआ है, जिस पर कानून अपना काम कर रहा है। सरकार किसी भी अपराधी को जनता की गाढ़ी कमाई हड़पने नहीं देगी। ब्रजेश पाठक ने कहा कि पार्टी का नाम ही नहीं, अखिलेश को भी अपना नाम बदल कर श्रेय यादव रख लेना चाहिए। 2017 में जनता द्वारा बुरी तरह नकारे गए अखिलेश यादव की आज की स्थिति पर तरस आता है। अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी जैसे माफिया की पैरवी करने वाले अखिलेश अपराधियों पर योगी सरकार की सख्ती से सबक लेने की बजाय पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ माफियाओं को अपना हमराह बना रहे हैं।
कानून मंत्री ने कहा कि माफिया पर योगी सरकार नकेल कस रही है और माफियावादी पार्टी को दोबारा सबक सिखाने के लिए जनता भी बेकरार है। आगामी विधानसभा चुनाव के पहले माफिया की फौज खड़ी कर अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बनने का ख्वाब देख रहे हैं लेकिन उन्हें एक बार 2017 का चुनाव परिणाम भी याद कर लेना चाहिए। जब उनकी सरकार द्वारा पोषित माफियागिरी से त्रस्त होकर जनता ने उन्हें कुर्सी से उठाकर फेंक दिया था।
यह भी पढ़ें:-बाराबंकी: शादी में जा रहे पिता-पुत्र की दर्दनाक मौत, महिला गंभीर
