रायबरेली: धान की उठान न होने से किसान परेशान, आए दिन हो रहा विवाद
रायबरेली। धान मिलर अपनी मांग पर डटे हुए हैं जिससे धान केंद्रों पर डंप पड़ा है और खरीद भी तेजी से नहीं हो पा रही है। केंद्र प्रभारियों के सामने धान खरीदकर रखने की समस्या आ रही है। टोकन लेकर किसान क्रय केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन धान खरीदा नहीं जा रहा है। …
रायबरेली। धान मिलर अपनी मांग पर डटे हुए हैं जिससे धान केंद्रों पर डंप पड़ा है और खरीद भी तेजी से नहीं हो पा रही है। केंद्र प्रभारियों के सामने धान खरीदकर रखने की समस्या आ रही है। टोकन लेकर किसान क्रय केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन धान खरीदा नहीं जा रहा है।
जिले में धान खरीद के लिए 73 क्रय केंद्र बनाए गए हैं और 1 लाख 71 हजार एमटी खरीद का लक्ष्य है। हाल यह है कि डेढ माह में 10 हजार एमटी धान की खरीद हो सकी है। डलमऊ में सहकारी समिति कठघर में खुले में धान पड़ा हुआ है। मिलर धान नहीं उठा रहे हैं। इस कारण धान के चोरी होने के साथ ओस में इसके बर्बाद होने का खतरा है। क्रय केंद्र प्रभारी समस्या बताकर धक गए हैं लेकिन कोई सुनने वाला है। केंद्र पर करीब 2500 क्विंटल धान खुला पड़ा है। इस केंद्र पर 16000 क्विंटल की खरीद का लक्ष्य है।
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वहीं 350 किसानों का पंजीकरण हुआ है और 78 किसानों को टोकन मिला है। धान बेचने के लिए किसान हर दिन आते हैं लेकिन धान डंप होने से खरीद नहीं हो पाती है, जिससे किसानों का विवाद होता है। साथ ही बोरा भी नहीं है, इस कारण किसानों को बोरा की भी व्यवस्था करनी पड़ती है। बोरों की कमी और मिलर तय न होने से यहां बहुत धीमी गति से धान खरीदा जा रहा है। गोदाम के नाम पर एक कमरा है, वह भी फुल हो चुका है। कठघर केंद्र प्रभारी राम प्रकाश सिंह का कहना है कि यदि मिलर तय हो जाएं तो गोदाम खाली हो जाए। इसके बाद तेजी के साथ धान खरीद की जा सकती है।
खुले में धान लगाने पर ओस व बेसहारा मवेशियों द्वारा नुकसान पहुंचाने का खतरा है। इसी प्रकार मंडी समिति लालगंज में ही बने दूसरे क्रय केंद्र में 45 हजार क्विटल धान खरीद का लक्ष्य है। यहां पर 10 हजार क्विंटल धान खरीदा गया है। गोदाम के नाम पर बनी तीन दुकानें धान से भर चुकी हैं। इस केंद्र में लगभग 600 किसान टोकन ले चुके हैं। महराजगंज में भी धान केंद्रों पर डंप पड़ा है। उठान न होने से खरीद नहीं हो पा रही है। किसान परेशान हैं।
जिला विपणन अधिकारी रामानंद जायसवाल ने कहा कि मिल संचालकों से बात हो रही है। कोई रास्ता जरूर निकलेगा। जहां कहीं भी धान खरीदा जा रहा है उसे सुरक्षित रखा जा रहा है।
