बरेली: डिवाइडर में पीली व पुरानी ईंटें मिली, ठेकेदार से होगी रिकवरी

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। ईंट पजाया से संजयनगर चौराहे के बीच बन रहे नए डिवाइडरों में पुरानी व पीली ईंटों को खपाने का मामला पकड़े जाने के बाद अब ठेकेदार से रिकवरी की तैयारी है। जांच अधिकारी अपर नगर आयुक्त सुनील यादव का कहना है कि जो डिवाइडर बन चुके हैं, उसमें कितनी पुरानी ईंटें लगी …

बरेली, अमृत विचार। ईंट पजाया से संजयनगर चौराहे के बीच बन रहे नए डिवाइडरों में पुरानी व पीली ईंटों को खपाने का मामला पकड़े जाने के बाद अब ठेकेदार से रिकवरी की तैयारी है। जांच अधिकारी अपर नगर आयुक्त सुनील यादव का कहना है कि जो डिवाइडर बन चुके हैं, उसमें कितनी पुरानी ईंटें लगी हैं, उसकी रिकवरी की जाएगी। इसके लिए इंजीनियरों को जांच के निर्देश दिए गए हैं। अब जो काम बचा है, उसमें सभी नई ईंटों का प्रयोग किया जा रहा है। असल में डिवाइडर का जो पक्का हिस्सा बन चुका है। उसके बाहरी ओर सीमेंट के ब्लॉक से कवर हो चुके हैं। ऐसे में डिवाइडर के अंदर कितनी दोयम दर्जे की ईंटों का इस्तेमाल किया गया है। इसकी सटीक गणना करने में इंजीनियरों के लिए दिक्कत आएगी।

नगर निगम 15वें वित्त आयोग से ईंट पजाया से संजयनगर चौराहे की ओर डेलापीर तक सड़क निर्माण में करीब 4.5 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। ईंट पजाया से संजयनगर चौराहे के बीच डिवाइडर बनाने में पुरानी और पीली ईंटों को खपाया जा रहा था। जबकि यहां नए सिरे से डिवाइडर का निर्माण प्रस्तावित है। रविवार को डीएम मानवेंद्र सिंह ने चेकिंग के दौरान डिवाइडरों को बनने में पीली व पुरानी ईंटों के प्रयोग करने का घपला पकड़ा था। यह प्रोजेक्ट राजीव ट्रेडर्स नाम की संस्था करा रही है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने अपर नगर आयुक्त सुनील यादव को जांच अधिकारी नामित कर डिवाइडरों की जांच करने के निर्देश दिए थे।

डीएम के स्पष्ट निर्देश थे कि निर्माण कार्य के एस्टीमेट का परीक्षण कर पुरानी ईंट के प्रावधान की स्थिति स्पष्ट होती है या एस्टीमेट के इतर कार्य हो रहा है तो इसके लिए जो भी जिम्मेदार हो, उस पर कड़ी कार्रवाई की जाए। जबकि इस प्रोजेक्ट का ठेका लेने वाली फर्म का कहना है कि अगर पुरानी ईंटें ठीक और इस्तेमाल करने योग्य हैं तो इसे बाद में इसकी लागत को एस्टीमेट में कम कर दिया जाता है। दिक्कत यह है कि ईंट पजाया से संजयनगर चौराहे के बीच करीब 60 से 70 फीसदी तक डिवाइडर बनाने का काम पूरा हो चुका है।

डिवाइडरों के लिए ईंटों की बाउंड्री बनाने के साथ उसके बाहरी हिस्से को सीमेंट के ब्लॉक से ढक भी दिया गया है। ऐसे में इंजीनियरों के लिए यह आंकलन करना मुश्किल बताया जा रहा है कि डिवाडइर में कितनी पुरानी और पीली ईंटों का प्रयोग हो गया है। हालांकि अपर नगर आयुक्त सुनील यादव इसमें निष्पक्ष जांच और रिकवरी का दावा कर रहे हैं।

डिवाइडरों की मजबूती को लेकर भी उठ रहे सवाल
इस रोड पर डिवाइडरों को बनाने के लिए पहले ईंटों की दीवार के साथ उसके आगे सीमेंट के ब्लॉक लगाए जा रहे हैं। जबकि इंजीनियरों का कहना है कि अगर इन डिवाइडरों में किसी बड़े वाहन की हल्की भी टक्कर लगेगी तो वे क्षतिग्रस्त हो जाएंगे। पहले भी इस रोड पर ईंटों के ही डिवाइडर बने थे और वाहनों की टकराने से वे कई जगह टूटकर टेढ़े-मेढ़े हो गए थे। नए डिवाइडर भी लगभग इसी तरह से बन रहे हैं। जबकि इंजीनियरों का कहना है कि पक्के डिवाइडर बनाने के लिए ईंटों के बजाय पूरी तरह से सीमेंट और सरिया का प्रयोग होना चाहिए तभी वे टिके रह सकेंगे।

वर्जन—
स्टेडियम रोड डिवाइडर निर्माण में अब ईंटों का ही प्रयोग किया जा रहा है। इस मामले को लेकर संबंधित अभियंताओं से वार्ता भी हुई हैं। पुरानी ईंटों का अगर अत्यधिक प्रयोग हुआ है तो ठेकेदार से रिकवरी के साथ ही अन्य कार्रवाई की जाएगी।
—सुनील यादव, अपर नगर आयुक्त

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