मुरादाबाद : अवैध कूड़ाघरों से पट रहीं कॉलोनियां, नहीं मिल रही राहत
मुरादाबाद, अमृत विचार। ‘क्लीन मुरादाबाद-ग्रीन मुरादाबाद’ का संदेश फिलहाल महानगर में सार्थक होता नजर नहीं आ रहा है। स्वच्छता अभियान में लगातार पिछड़ने के बाद भी सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं हो पाया है। निगम अधिकारियों के तमाम दावों के बाद भी महानगर की कई कॉलोनियां अवैध तरीके से बन चुके कूड़ाघरों में तब्दील होती …
मुरादाबाद, अमृत विचार। ‘क्लीन मुरादाबाद-ग्रीन मुरादाबाद’ का संदेश फिलहाल महानगर में सार्थक होता नजर नहीं आ रहा है। स्वच्छता अभियान में लगातार पिछड़ने के बाद भी सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं हो पाया है। निगम अधिकारियों के तमाम दावों के बाद भी महानगर की कई कॉलोनियां अवैध तरीके से बन चुके कूड़ाघरों में तब्दील होती जा रही हैं। ये कूड़ाघर बन रहे हैं कॉलोनियों के मैदान और बिना चारदीवारी के प्लॉट।
अवैध कूड़ाघरों की बढ़ रही संख्या में काफी हद तक निगम अधिकारियों की लापरवाही सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि खाली स्थानों पर निगमकर्मी कूूड़ा डालकर चले जाते हैं। बाद में बदबू आने पर स्थानीय लोगों को परेशानी होती है तो ठीकरा निगम अधिकारियों पर फोड़ देते हैं।
मुरादाबाद महानगर के 70 वार्डो में करीब नौ लाख की आबादी बसती है। निगम के रिकॉर्ड के अनुसार इन वार्डो से प्रतिदिन चार से साढ़े चार टन कूड़ा निकला जाता है। इन वार्डो से कूड़ा उठवाने के लिए करीब 2200 सफाईकर्मियों की तैनाती नगर निगम द्वारा की गई है। डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए मौजूदा समय में चार कंपनियां महानगर में काम कर रही हैं। इसके बावजूद तमाम संसाधनों और दावों के बाद भी महानगर की सफाई व्यवस्था बेपटरी नजर आती है। निगमकर्मियों की लापरवाही के साथ ही आम जनता में से भी कुछ लोग इसके लिए जिम्मेदार हैं।
डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की व्यवस्था शुरू होने के बाद निगम ने कई मुहल्लों व प्रमुख स्थानों पर रखे डस्टबिन हटवा दिए थे। लिहाजा जब सफाईकर्मी नहीं आते हैं तो स्थानीय लोगों ने मुहल्ले के बिना चारदीवारी के प्लाटों पर कूड़ा डालना शुरू कर दिया। ऐसे में धीरे-धीरे ये प्लॉट पूरी तरह से कूड़ाघर में बदल गए। ऐसे में महानगर की हालत दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। न तो जनता अपनी जिम्मेदारी समझ रही है, न ही निगम के अधिकारी व कर्मचारी।
जुर्माना डालने के बाद भी बंद नहीं हो रहे कूड़ाघर
अवैध तरीके से कालोनियों में बन रहे कूड़ाघरों पर कई बार स्थानीय लोग और निगम अधिकारी भी आमने-सामने आ चुके हैं। अगर निगम अधिकारी चालानी कार्रवाई करते हैं तो वह डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की व्यवस्था में सवाल उठाने लगते हैं। कई मामलों में निगम ने प्लाट मालिकों को नोटिस भेजा तो उन्होंने स्थानीय लोगों द्वारा जबरन कूड़ा डालने की बात कह दी। नतीजा यह हुआ कि अवैध तरीके से बढ़ रहे कूड़ाघरों की संख्या पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
रेलवे ट्रैक किनारे से नहीं उठाया गया कूड़ा
सड़क व रेलवे ट्रैक किनारे बन रहे कूड़ाघरों का मुद्दा जब अमृत विचार ने उठाया। कुछ स्थानों की तस्वीर के साथ खबर प्रकाशित की तो निगम अधिकारियों ने कहा कि मौके पर सफाई कर्मियों को भेजकर कूड़ा उठवाया जाएगा। हालांकि यह बात दीगर है कि सफाई कर्मियों के न जाने से अभी भी कूड़ा पड़ा है। हिमगिरि कालोनी में रेलवे ट्रैक के किनारे लगे कूड़े के ढ़ेर में किसी ने मृत जानवर को डाल दिया। जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पौने दो लाख जुर्माना वसूला : नगर आयुक्त
सवाल: सफाई व्यवस्था के क्या हैं इंतजाम
जवाब : कटघर क्षेत्र में ट्रंचिंग ग्राउंड बन चुका है। नियमित चार टन से अधिक कूड़ा यहां पर डाला जाता है। डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। नई कंपनियों से अनुबंध करने की तैयारी है।
सवाल : कॉलोनियों में क्यों बने अवैध कूड़ाघर
जवाब : डोर टू डोर कलक्शन के माध्यम से कूड़ा उठवाया जा रहा है। इसके बाद भी कई कालोनियों में लोग प्लॉटों में कूड़ा डालकर गंदगी फैला रहे हैं। इस पर प्लाट मालिकों से जुर्माना भी वसूला जा रहा है।
सवाल : कूड़ा कोई डाले जुर्माना प्लॉट मालिक से क्यों
जवाब : महानगर को स्वच्छ बनाने के लिए कई बार प्लॉट मालिकों को नोटिस दिए गए हैं। ये नोटिस प्लॉट के चारो ओर चारदीवारी बनाने को लेकर हैं। उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि अगर वे चारदीवारी नहीं करवाते हैं और प्लाट पर कूड़ा मिलता है तो उनसे जुर्माना वसूला जाएगा।
सवाल : अभी तक कितना जुर्माना वसूला
जवाब: नियमानुसार पांच हजार रुपये तक का जुर्माना वसूला जाता है। हालांकि पहले निगम की ओर से नोटिस दिया जाता है। पिछले काफी समय में प्लॉट मालिक व नालियों में गंदगी फैलाने वालों से करीब पौने दो लाख रुपये का जुर्माना वसूला जा चुका है।
सवाल : खाली स्थानों से कूड़ा उठवाने की क्या की गई है व्यवस्था
जवाब : वैसे तो सभी स्थानों पर डस्टबिन रखे हुए हैं। इसके बाद भी अगर सड़क या फिर ट्रैक किनारे कूड़ा फेंका जाता है तो उसे सफाईकर्मी और वाहन भेजकर कूड़ा उठवाकर ट्रंचिंग ग्राउंड भेज दिया जाता है।
