लखनऊ: फोरम ऑफ रेगुलर की बैठक में लिये जा सकते हैं अहम निर्णय

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कुछ राजनीतिक दलों की ओर से किये जा रहे मुफ्त बिजली के वादे के बीच राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को होने वाली फोरम ऑफ रेगुलर की 77वीं बैठक में केन्द्र और 20 से ज्यादा राज्यों के विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन ऊर्जा क्षेत्र के अहम विषयो पर महत्वपूर्ण …

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कुछ राजनीतिक दलों की ओर से किये जा रहे मुफ्त बिजली के वादे के बीच राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को होने वाली फोरम ऑफ रेगुलर की 77वीं बैठक में केन्द्र और 20 से ज्यादा राज्यों के विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन ऊर्जा क्षेत्र के अहम विषयो पर महत्वपूर्ण फैसले ले सकते हैं।

नियामक आयोग सभागार में होने वाली बैठक में केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन पीके पुजारी के अलावा उत्तर प्रदेश समेत 20 राज्यों के विद्युत नियामक बोर्ड के अध्यक्ष शिरकत करेंगे। पूरे देश के ऊर्जा सेक्टर के महत्वपूर्ण मुद्दों के अलावा उपभोक्ता हितो में चर्चा करेंगे। इस दौरान सस्ती और निर्बाध विद्युत आपूर्ति को लेकर अहम निर्णय लिए जा सकते हैं।

इस बीच विद्युत उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने गुरुवार को कहा कि बैठक में देश भर के 25 करोड़ विद्युत उपभोक्ताओं की तरफ से दो महत्वपूर्ण मुद्दों उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के लिये सस्ती बिजली दरों का निर्धारण करने और एनर्जी एक्सचेंजों पर महंगी बिजली बेचने पर प्रतिबन्ध लगाने के लिये सीलिंग लगाने पर विचार विमर्श की पूरी उम्मीद है। उन्होंने कहा कि इस सिलसिले में उन्होने एक प्रस्ताव फोरम ऑफ रेगुलेटर व केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन पीके पुजारी और प्रदेश नियामक आयोग के चेयरमैन व सदस्य फोरम ऑफ रेगुलेटर आरपी सिंह को भेजा है और उपभोक्ताओ के हित में चर्चा कर निर्णय लिए जाने की मांग उठाई है। वर्मा ने कहा कि देश में जिस भी राज्य में चुनाव नजदीक आता है।

पढ़ें: लखनऊ: 1971 के युद्ध में मिली जीत की गोल्डन जुबली का सेना ने मनाया जश्न

वहां फ्री बिजली का अहम मुद्दा राजनैतिक पार्टियों के लिए अहम होता जा रहा है। सभी को पता है बिजली दर तय करने का काम राज्य के नियामक आयोगों का है। लेकिन पार्टिया सब्सिडी के आधार पर फ्री बिजली देने का वादा करती है। सभी को पता है कि फ्री बिजली लम्बे समय तक उपलब्ध कराना देश और प्रदेश के लिए हितकर नहीं हो सकता और न ही लम्बे समय के लिए कारगर है। लेकिन देश के उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली मिले यह तर्क पूर्ण और न्याय संगत है। पूरे देश के नियामक आयोगों को अब देश के लगभग 25 करोड़ उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली कैसे उपलब्ध हो, इस दिशा में विचार करना चाहिए। दूसरा अहम मुद्दा सितम्बर माह में भारी वर्षा के चलते पूरे देश में कोयले का संकट सामने आया जिस दौरान देश के एनर्जी एक्सचेंजों पर रुपया पांच प्रति यूनिट लागत की बिजली को रुपया 18 प्रति यूनिट तक बेचा गया।

संबंधित समाचार