लखनऊ: तो अब वैध हो जाएंगे 24 मीटर चौड़ी सड़कों पर अवैध निर्माण
लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की 172वीं बोर्ड बैठक में 24 मीटर चौड़ी सड़कों पर शर्तों के साथ व्यवसायिक निर्माणों को स्वीकृति का प्रस्ताव पास हो गया है। देखना यह है कि यह निर्णय कितना कारगर साबित होगा। प्राधिकरण की योजनाओं में 24 मीटर चौड़ी सड़कों पर स्थित सम्पत्तियों में से 75 प्रतिशत पर पहले …
लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की 172वीं बोर्ड बैठक में 24 मीटर चौड़ी सड़कों पर शर्तों के साथ व्यवसायिक निर्माणों को स्वीकृति का प्रस्ताव पास हो गया है। देखना यह है कि यह निर्णय कितना कारगर साबित होगा। प्राधिकरण की योजनाओं में 24 मीटर चौड़ी सड़कों पर स्थित सम्पत्तियों में से 75 प्रतिशत पर पहले ही लोग अवैध निर्माण कर आवासीय में व्यवसायिक इस्तेमाल कर रहे हैं।
24 मीटर चौड़ी सड़कों पर व्यवसायिक इस्तेमाल की अनुमति प्राधिकरण के लिए फायदेमंद है लेकिन अवैध निर्माणकर्ताओं को यह महंगा साबित हो सकता है। अपना निर्माण वैध कराने या व्यवसायिक के लिए अनुमति प्राप्त करने के लिए पहले आवेदन करना होगा।साथ ही महायोजना 2031 के प्राविधान के अनुसार दोगुना शुल्क जमा करना पड़ेगा। इसके लिए प्रस्ताव बोर्ड बैठक में पास होने के बाद ही स्वीकृति मिलेगी। जिसमें समय के साथ पैसा भी ज्यादा लगेगा।
इस योजना के तहत प्राधिकरण की कानपुर रोड, आशियाना, जानकीपुरम, अलीगंज, गोमती नगर आदि योजनाओं के आवंटियों को फायदा होगा। प्राधिकरण के मानचित्र सेल के एक अधिकारी के अनुसार इससे लोगों को कोई खास फायदा नहीं मिलने वाला है। पहले तो लोगों को इसके लिए आवेदन करना पड़ेगा साथ ही शुल्क भी काफी ज्यादा जमा करना पड़ेगा। जो हर किसी के बस की बात नहीं होगा।
इनके लिए नहीं मिलेगी अनुमति
आवासीय के भू उपयोग परिवर्तन की कुछ सेवाओं के लिए अनुमति नहीं दी जाएगी। जिससे क्षेत्रीय निवासियों को परेशानी ना हो। सचिव पवन गंगवार ने बताया कि रिहाइशी इलाकों में प्रमुख रूप से बारात घर, गेस्ट हाउस, पेट्रोल पंप, कोल्ड स्टोरेज आदि के लिए अनुमति नहीं दी जाएगी।
आवासीय में व्यवसायिक उपयोग बंद कराना चुनौती
प्राधिकरण की योजनाओं में पहले से आवासीय में चल रहे व्यवसायिक उपयोग को बंद कराना चुनौती होगा। योजनाओं की 24 मीटर सड़कों पर पहले ही आवासीय की जगह 75 प्रतिशत व्यवसायिक इस्तेमाल हो रहा है। इसके अलावा कई लोगों ने मानचित्र के अनुसार निर्माण ना कर पार्किंग के लिए तक जगह नहीं छोड़ी है। इनके खिलाफ जोनों के प्रवर्तन दस्तों द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। ऐसी स्थिति में अब प्रवर्तन जोनों द्वारा अवैध निर्माणों पर कार्रवाई कर पाना और मुश्किल होगा।
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