लखनऊ: हड़ताल के दूसरे दिन भी सरकारी बैंकों में लेन-देन रहा ठप

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लखनऊ। निजीकरण के विरोध में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंको की दो दिवसीय हड़ताल के दूसरे दिन और अंतिम दिन शुक्रवार को भी उत्तर प्रदेश में बैंकों में सामान्य कामकाज बुरी तरह प्रभावित रहा। हड़ताल के चलते सभी सरकारी बैंको के शाखाओं और कार्यालयों में लेन देन ठप रहा। जबकि ऑनलाइन बैंकिग में नेटवर्क की समस्या …

लखनऊ। निजीकरण के विरोध में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंको की दो दिवसीय हड़ताल के दूसरे दिन और अंतिम दिन शुक्रवार को भी उत्तर प्रदेश में बैंकों में सामान्य कामकाज बुरी तरह प्रभावित रहा। हड़ताल के चलते सभी सरकारी बैंको के शाखाओं और कार्यालयों में लेन देन ठप रहा। जबकि ऑनलाइन बैंकिग में नेटवर्क की समस्या ने लोगों को परेशान किया। हड़ताल के कारण पेन्शनधारकों, वेतनभोगियों और आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ा।

शाखाओं में जमा व निकासी, एफडी रिन्यू, ऋण सम्बन्धी कार्य, सरकारी खजाने एवं व्यापार से जुडे़ कामों पर भारी असर पड़ा। यूपी बैंक एम्पलाइज यूनियन का दावा है कि दो दिनों की हड़ताल से लखनऊ में लगभग 3 हजार करोड़ और प्रदेश में 40 हजार करोड़ का लेनदेन प्रभावित रहा। हड़ताल के दोनों दिन राष्ट्रीयकृत बैंकों के लखनऊ जिले की 905 शाखाओं के 10 हजार बैंककर्मी और प्रदेश की 140 हजार शाखाओं के दो लाख बैंककर्मी शामिल रहें। लखनऊ में 990 और प्रदेश के 12000 एटीएम मशीनों में से कई मशीनों में कैश समाप्त होने व एटीएम खराब व बन्द पड़े होने के कारण लोग अपना पैसा नहीं निकाल सके।

इण्डियन बैंक हजरतगंज में सभा को सम्बोंधित करते हुये ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पवन कुमार ने आरोप लगाया कि बैंकों में जमा जनता के धन पर पूंजीपतियों और नेताओं की नजर है। बैंकों के निजीकरण होने पर सरकार उन्हें बड़े लोन स्वीकृत करायेगी फिर ऋण लेने वाला ऋण को एनपीए कराने के बाद मात्र 10 या 15 प्रतिशत धनराशि देकर ऋण का सेटलमेंट करा लेगा या देश छोड़कर भाग जायगा। विजय माल्या, नीरव मोदी, चन्दा कोचर आदि प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। जनता भी अब इस चाल को समझ चुकी है। हम सरकार की मनमानी नहीं चलने देंगे।

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यूपी बैंक इम्पलाइज यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष दीप बाजपेई ने अपील की कि सरकार की ओर से राष्ट्रीयकृत बैंकों को बेचने के विरूद्ध आवाज उठाने में जनता साथ दें। इन बैंकों के लाखों छोटे जमाकर्ता, किसान, छोटे और मझौले उद्योग, स्वयं सहायता समूह और छोटे कर्जदारों के साथ राजनीतिक दलों और श्रम संगठनों से अनुरोध है कि हमारे आंदोलन में शामिल हो जिससे कि जनता की गाढ़ी कमाई को बर्बाद होने से रोका जा सके। इंडियन बैंक अधिकारी संघ के आर.एन.शुक्ला ने बताया कि बैंक निजीकरण से बैंक जमा की सुरक्षा कमजोर होगी, भारत में जमाकर्ता की कुल बचत, जो कि 87.6 लाख करोड़ रूपये है, का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा 60.7 लाख करोड़ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के पास है, जो कि अपनी जमा के लिए सरकारी बैंकों को प्राथमिकता देते हैं।

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