लखनऊ: हज यात्रा 2022 पर ओमीक्रॉन का खतरा, बढ़ी हज कमेटी की मुश्किलें
लखनऊ। हज यात्रा 2022 पर कोरोना के नए वैरियंट ओमीक्रॉन का खतरा मंडराने लगा है। हज यात्रा के लिए आवेदन शुरू हुए डेढ़ महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक प्रदेशभर से तीन हजार से भी कम लोगों ने ही यात्रा पर सऊदी अरब जाने की इच्छा जताई है। प्रदेश में आवेदन की सुस्त रफ्तार …
लखनऊ। हज यात्रा 2022 पर कोरोना के नए वैरियंट ओमीक्रॉन का खतरा मंडराने लगा है। हज यात्रा के लिए आवेदन शुरू हुए डेढ़ महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक प्रदेशभर से तीन हजार से भी कम लोगों ने ही यात्रा पर सऊदी अरब जाने की इच्छा जताई है।
प्रदेश में आवेदन की सुस्त रफ्तार ने स्टेट हज कमेटी की मुश्किलें बढ़ा दी है। ऐसे में प्रदेश के संभावित हज कोटे की सीटें भरना कमेटी के लिए आसान नहीं होगा। हज यात्रा के आवेदन की अंतिम तिथि 31 जनवरी है।
सेंट्रल हज कमेटी ऑफ इंडिया की साल 2022 की गाइडलाइन के मुताबिक एक नवंबर से प्रदेश में ऑनलाइन हज आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसबार सेंट्रल ने 70 साल या उससे अधिक आयु के लोगों के आवेदन पर लगी रोक भी हटा दी है। अब पहले ही तरह 70 प्लस कटेगरी के आवेदकों को भी हज यात्रा का मौका मिल सकेगा। कोरोना की वजह से साल 2019 व 2020 में सरकार ने 65 साल के आवेदकों पर रोक लगा रखी थी।
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इसके बावजूद भी अभी तक केवल 2699 लोगों ने ही हज यात्रा के लिए आवेदन किया है। ऑनलाइन आवेदन करने वालों में मेहरम कोटे से चार महिलाएं भी शामिल हैं, जिन्होंने एक कवर नंबर पर ग्रुप में हज यात्रा की इच्छा जताई है। इस संबंध में स्टेज हज कमेटी के सचिव राहुल गुप्ता ने बताया कि, प्रदेश से अभी तक 2699 लोगों ने आवेदन किया है। 31 जनवरी आवेदन की अंतिम तिथि है। शेष 40 दिनों में आवेदन की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है। अभी तक प्रदेश का कोटा निर्धारित नहीं किया गया है।
आवेदन शुल्क रिफंड न होना भी एक वजह
हज यात्रा के लिए ऑनलाइन आवेदन करते समय आवेदकों को 300 रुपये शुल्क जमा करना होता है। पिछले दो सालों में हज यात्रा निरस्त होने के बाद आवेदकों को कोई पैसा वापस नहीं किया गया। आवेदन शुल्क रिफंड न होने से भी इस सुस्त रफ्तार की वजह है।
नहीं शुरू हुई नियमित उड़ानें
ओमीकॉन के लगतार बढ़ते खतरे को देखते हुए बंद चल रही नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी अभी तक चालू नहीं हो सकी हैं। सऊदी अरब सहित गल्फ देशों की उड़ाने कब से शुरू होंगी इसकी भी अब तक कोई सूचना नहीं है।
2019 में 32 हजार था प्रदेश का कोटा
कोरोना से पहले साल 2019 में उप्र का हज कोटा करीब 32 हजार सीटों का था। लेकिन, कोरोना जैसी वैश्विक महामारी फैलने से साल 2020 व 2021 की हज यात्रा निरस्त कर दी गई थी। सेंट्रल हज कमेटी ने अभी तक प्रदेश के कोटे की सीटों का निर्धारण नहीं किया है। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने तक सीटों का निर्धारित होने की संभावना है।
