लखनऊ: बसों की कमी से चालकों-परिचालकों को नहीं मिल रही ड्यूटी
लखनऊ। कोरोना काल के बाद अभी तक रोडवेज बसों का संचालन पटरी पर नहीं आ सका है। मरम्मत के अभाव में सभी क्षेत्रों की तकरीबन 30 प्रतिशत बसों को कार्यशालाओं में खड़ा देखा जा रहा है। ऐसे में चालक-परिचालक परेशान हो रहे हैं। उन्हें ड्यूटी नहीं मिल पा रही है। चालकों-परिचालकों के अनुसार जिन बसों …
लखनऊ। कोरोना काल के बाद अभी तक रोडवेज बसों का संचालन पटरी पर नहीं आ सका है। मरम्मत के अभाव में सभी क्षेत्रों की तकरीबन 30 प्रतिशत बसों को कार्यशालाओं में खड़ा देखा जा रहा है। ऐसे में चालक-परिचालक परेशान हो रहे हैं। उन्हें ड्यूटी नहीं मिल पा रही है।
चालकों-परिचालकों के अनुसार जिन बसों को आसानी से ठीक कराया जा सकता है, वह भी सरकारी औपचारिकता पूरी करने के चक्कर में कार्यशाला में खड़ी है। रोडवेज के अधिकारियों के अनुसार बसों मरम्मत कर पटरी पर लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
चालकों-परिचालकों के अनुसार प्रदेश के 20 क्षेत्रों की तकरीबन 30 प्रतिशत बसें कार्यशालाओं में मरम्मत के इंतजार में खड़ी हैं। ऐसे में संविदा पर कार्य करने वाले चालकों-परिचालकों के सामने जीविकोपार्जन का संकट खड़ा हो गया है। संविदा पर तैनात चालक-परिचालक को प्रति किमी की दर से भुगतान किया जाता है। बसों की कमी के चलते चालक-परिचालक बस अड्डों पर बने ड्यूटी रूम तो आ रहे हैं लेकिन उन्हें वहीं से वापस भेज दिया जाता है।
चालकों ने बताया कि रोडवेज की जो बसें रोड पर चल रही है वह भी हम अपने जोखिम पर लेकर जाते हैं। फोरमैन इनकी फिटनेस भी नहीं देता है। लेकिन चालक-परिचालक वेतन के लिए कबाड़ बसों को चलाने के लिए मजबूर हैं। कई बार तो बसें भी हम बनवाते हैं। यह खतरा बना रहता है कि कहीं कार्यशाला में जाने के बाद यह बस भी न खड़ी हो जाए।
रोडवेज कर्मचारी संघ के प्रदेश प्रवक्ता रजनीश मिश्रा ने कहा कि बसों के खड़ा होने से यात्रियों के साथ चालकों-परिचालकों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। कार्यशालाओं में कई बसें तो ऐसी है जिन्हें आसानी से मरम्मत कर रोड पर उतारा जा सकता है।
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परिवहन निगम के मुख्य प्रधान प्रबंधक प्राविधिक संजय शुक्ला ने कहा कि वहीं हाल ही में बसों की मरम्मत के लिए योजना तैयार की गई है। खराब बसों को दोगुनी लागत खर्च कर तैयार किया जा रहा है। तीन महीने के यह योजना तैयार की गई है। 15 जनवरी तक सभी बसों के मरम्मतीकरण का काम पूरा कर लिया जाएगा।
