मुरादाबाद : बैंकों की मनमानी से अटकी लोन की फाइलें, ऐसे में कैसे मिलेगा याेजना का लाभ

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Edited By Amrit Vichar
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मुरादाबाद, अमृत विचार। कोरोना की मार से जूझ रहे फल-रेहड़ी वालों को शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सरकार ने पंजीकृत फड़-रेहड़ी वालों को 10 हजार रुपये का लोन देने की योजना शुरू की है। हैरानी की बात यह है कि लोन के तहत मिलने वाली धनराशि कागजों में फंसकर रह …

मुरादाबाद, अमृत विचार। कोरोना की मार से जूझ रहे फल-रेहड़ी वालों को शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सरकार ने पंजीकृत फड़-रेहड़ी वालों को 10 हजार रुपये का लोन देने की योजना शुरू की है।
हैरानी की बात यह है कि लोन के तहत मिलने वाली धनराशि कागजों में फंसकर रह गई है।

लंबा वक्त बीतने के बाद भी बैंक अधिकारियों की हीला-हवाली के कारण करीब 1900 आवेदकों को लोन नहीं मिल सका। कई बार बैंक के चक्कर काटने के बाद भी कागजी कार्यवाही में उलझे तो वह घर बैठ गए। इधर चुनावी सुगबुगाहट के बीच शासन ने इस पर नाराजगी व्यक्त की तो नगर निगम अधिकारियों में हड़कंप मच गया। सभी आवेदकों को लोन उपलब्ध कराने के लिए निगम अधिकारियों ने संपर्क करना शुरू कर दिया है।

कोरोना के बाद राहत देने को शुरू की थी योजना
मार्च वर्ष 2020 को कोरोना के कारण पूरे देश में लाकडाउन लग गया था। करीब डेढ़ माह तक चले लाकडाउन के कारण उद्योग-धंधे व सभी कारोबार पूरी तरह से बंद हो गए थे। मध्यम व निम्नवर्ग के लोग लाकडाउन में आर्थिक रूप से पूरी तरह से टूट गए थे। लिहाजा जुलाई में 2020 में केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि योजना) शुरू की थी। जिसके तहत सड़क किनारे ठेले या रेहड़ी-पटरी पर दुकान चलाने वाले, फल-सब्जी, लॉन्ड्री, सैलून और पान की दुकानें लगाने वाले, हॉकर्स आदि पीएम स्वनिधि के तहत 10 हजार रुपये तक का लोन ले सकते हैं। हालांकि इसके लिए शर्त यह थी कि सभी वेंडर्स 24 मार्च 2020 से पहले से वेडिंग कर रहे हों और निकाय में उनका पंजीयन हो।

फाइलों में उलझे रह गए वेंडर नहीं मिला याेजना का लाभ
मुरादाबाद महानगर की बात करें तो मौजूदा समय में निगम में करीब 20 हजार वेंडर पंजीकृत हैं। जुलाई में योजना लांच हुई तो वेंडरो ने आवेदन करने शुरू कर दिए। जरूरी प्रपत्रों के साथ आवेदन नगर निगम कार्यालय में जमा कराए गए। जहां से संबंधित बैंकों को लोन के लिए आवेदन भेज दिए गए। अब यहां पर वेंडर लोन की फाइलों में उलझ गया। अक्सर बैंक अधिकारी कागज पूरे न होने का हवाला देकर आवेदकों को टरका देते। कई बार चक्कर काटने के बाद लोन नहीं मिला तो वेंडर भी थकहार कर घर में बैठ गया।

शासन की फटकार पर निगम के अधिकारी अब कर रहे संपर्क
शासन स्तर से नाराजगी जाहिर होने के स्थानीय निगम अधिकारी भी हरकत में आ गए। आनन-फानन में बैंकों से डाटा लेने के बाद निगम अधिकारी फोन के जरिए आवेदकों से संपर्क कर रहे हैं। आश्वासन दिया जा रहा है कि बैंक से समय से लोन दिलाया जाएगा।

योजना के तहत जिन आवेदकों को लोन नहीं मिल सका है, उनसे संपर्क किया जा रहा है। इसके अलावा नए वेंडरों को भी योजना का लाभ दिलाने के लिए उनका पंजीयन कराने का काम चल रहा है। संजय चौहान, नगर आयुक्त

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