चुनाव आयोग ने प्रसपा से छीनी चाबी, अब साइकिल की सवारी ही विकल्प, जानें वजह

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लखनऊ। प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) का गठबंधन हो चुका है। सीट बंटवारे पर बातचीत भी करीब आखिरी दौर पर है। इस बीच निर्वाचन आयोग ने प्रसपा को पूर्व में आवंटित चिन्ह चाबी निरस्त कर दिया है। ऐसी स्थिति में अब शिवपाल सिंह यादव और उनकी …

लखनऊ। प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) का गठबंधन हो चुका है। सीट बंटवारे पर बातचीत भी करीब आखिरी दौर पर है। इस बीच निर्वाचन आयोग ने प्रसपा को पूर्व में आवंटित चिन्ह चाबी निरस्त कर दिया है। ऐसी स्थिति में अब शिवपाल सिंह यादव और उनकी पार्टी के कई नेता सपा के चुनाव चिन्ह साइकिल पर चुनाव लड़ेंगे।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रसपा प्रमुख शिवपाल सिंह यादव ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से इस मुद्दें पर बातचीत भी कर ली है। साइकिल चुनाव चिन्ह पर ही चुनाव मैदान में उतरेंगे। दरअसल प्रसपा की स्थापना शिवपाल सिंह यादव ने वर्ष 2018 में की थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में चुनाव आयोग ने पार्टी को चुनाव चिन्ह चाबी आवंटित किया था।

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चाबी चुनाव चिह्न के साथ लोकसभा चुनाव में उतरी तो प्रसपा को महज 0.31 फीसद वोट ही मिले। ऐसी स्थिति में पिछले दिनों निर्वाचन आयोग ने चुनावों में एक फीसद वोट न मिलने के कारण प्रसपा को आवंटित चिन्ह चाबी को निरस्त कर दिया था। प्रसपा प्रवक्ता दीपक मिश्र का कहना है कि हमारे पास गठबंधन के चलते चुनाव चिन्ह साइकिल है। यह रणनीति का हिस्सा है। संप्रदायिक ताकतों को हराने के लिए हम एकजुट है। हालांकि चुनाव आयोग में चुनाव चिन्ह के लिए आवेदन किया जाएगा।

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