मुरादाबाद : रिजवान पर मुकदमा अटकाएगा रोड़ा !
आशुतोष मिश्र/मुरादाबाद, अमृत विचार। एसोसिएट डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (लोकतांत्रिक सुधार) ने समाजवादी पार्टी के जिन पांच विधायकों के प्रत्याशिता पर तलवार लटकायी है, इसमें हाजी रिजवान एक हैं। हाजी रिजवान जिले की कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र के विधायक हैं। यह क्षेत्र समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है। जबरदस्त घेरेबंदी के बाद भी वर्ष 2017 के चुनाव …
आशुतोष मिश्र/मुरादाबाद, अमृत विचार। एसोसिएट डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (लोकतांत्रिक सुधार) ने समाजवादी पार्टी के जिन पांच विधायकों के प्रत्याशिता पर तलवार लटकायी है, इसमें हाजी रिजवान एक हैं। हाजी रिजवान जिले की कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र के विधायक हैं।
यह क्षेत्र समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है। जबरदस्त घेरेबंदी के बाद भी वर्ष 2017 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का यहां कमल नहीं खिल पाया था। यह भी सच है कि सपा और भाजपा के उम्मीदवारों के बीच तीखी भिड़ंत हुई थी। भारतीय जनता पार्टी ने रामवीर सिंह एडवोकेट को मैदान में उतारा था। बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार रहे पूर्व मंत्री हाजी अकबर यहां टक्कर नहीं दे पाए थे।
एडीआर की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक गलियारे में इस बात की चर्चा है, कि कुंदरकी क्षेत्र से हैट्रिक लगाने वाले हाजी रिजवान अबकी फंस सकते हैं। यह रिपोर्ट अगर प्रभावी हुई उनकी उम्मीदवारी पर ब्रेक लग जाएगा। जानकार बताते हैं कि सूचीबद्ध अपराधों के आधार पर ऐसे लोगों के चरित्र का निर्धारण होना है। इस रिपोर्ट को देखने के बाद चुनाव आयोग उम्मीदवारी पर निर्णय लेगा। अगर चुनाव आयोग ने इस रिपोर्ट के आधार पर हाजी रिजवान को दागदार मान लिया तो उनके मैदान में उतरने का रास्ता बंद हो जाएगा।
हाजी रिजवान की राजनीतिक डायरी बताती है कि इन्होंने साल 1991 में इस क्षेत्र में कदम रखा। पांच साल जिला पंचायत के सदस्य रहे। उसके बाद समाजवादी पार्टी ने 1996 में विधान सभा का टिकट दे दिया। चौथी बार विधायक चुने गए रिजवान साल 2007 का चुनाव हार गए। साल 1996, 2002 2012 और 2017 में जनता ने अपना प्रतिनिधि चुना है। साल 2002 से हैट्रिक लगाने वाले रिजवान वर्ष 2022 के चुनाव में साइकिल दौड़ाने को बेताब हैं।
विधायक हाजी रिजवान कहते हैं कि एडीआरए का हमारी सेहत पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। हमारे खिलाफ कोई मामला ही नहीं है। वर्ष 2007 लालपुर गांव में मतदान के मुद्दे पर दर्ज कराया गया मामला निस्तारित हो गया है। मुझे और बेटे सहित 18 लोगों को आरोपित किया गया था। पहले हम दोनों पर अपराध सिद्ध नहीं हो पाया। इसके बाद अन्य 16 लोग भी हाईकोर्ट से बाइज्जत बरी हो गए। जबरन इस प्रकरण को धारा 156 (3) के तहत एमपी-एमएलए कोर्ट में डाला गया है।
