रामपुर: कोसी नदी में अवैध खनन का खेल- नदी की धार से 100 मीटर पर खोल दिए स्टोन क्रशर

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

रामपुर, अमृत विचार। स्वार तहसील में कोसी नदी के किनारे खोले गए स्टोन क्रशर अवैध खनन को बढ़ावा दे रहे हैं। यह स्टोन क्रशर स्थापित किए जाने के कोई मानक पूरे नहीं करते हैं। नदी की धारा से मात्र 100 मीटर की दूरी पर क्रशर बनाकर आबादी और बाग बगीचों के बीच दूरी के मानकों …

रामपुर, अमृत विचार। स्वार तहसील में कोसी नदी के किनारे खोले गए स्टोन क्रशर अवैध खनन को बढ़ावा दे रहे हैं। यह स्टोन क्रशर स्थापित किए जाने के कोई मानक पूरे नहीं करते हैं। नदी की धारा से मात्र 100 मीटर की दूरी पर क्रशर बनाकर आबादी और बाग बगीचों के बीच दूरी के मानकों का भी पालन नहीं किया जा रहा है। हाल यह है कि पूरे इलाके में प्रदूषण फैल रहा है। लेकिन वन, खनन विभाग के अलावा प्रशासन के अफसर भी इनकी मनमानी पर अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं। अफसर मौका मुआयना करने के बजाए फाइलों में मानक पूरे होने की ओके रिपोर्ट लगा देते हैं।

स्वार तहसील के पट्टी कलां और घोसीपुरा में करीब 40 स्टोन क्रशर के लाइसेंस हैं। कुछ अवैध तरीके से भी संचालित हो रहे हैं। इनमें से कुछ स्टोन क्रशर मालिक अपने आपको प्रदेश सरकार के एक मंत्री का रिश्तेदार बताते हैं। कोसी नदी की के फ्लड एरिया से कम से कम पांच सौ मीटर की दूरी पर इन्हें स्थापित करने की शर्तों पर ही लाइसेंस जारी किया जाता है। लेकिन कुछ स्टोन क्रशर नदी के फ्लड एरिया की तो बात दूर नदी की धारा से 100 मीटर से कम दूर ही चल रहे हैं।

बाग-बगीचा और नर्सरियों से दूरी 1500 मीटर यानी डेढ़ किलो मीटर पूरव से पश्चिम होनी चाहिए, वहीं उत्तर दक्षिण की दूरी 500 मीटर होने की शर्त है, लेकिन 300 से 500 मीटर की दूरी पर इन्हें चलाया जा रहा है। आबादी से एक किलोमीटर होने की शर्त है, फिर भी आबादी से सटाकर क्रशर चल रहे हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग से 500 मीटर दूरी के मानक को भी पूरा नहीं किया जा रहा है। नियमानुसार ग्रीन वेल्ट को किसी क्रशर मालिक ने विकसित नहीं किया है।

शर्त यहां तक है कि क्रशर लगाने के लिए एक हेक्टेयर जमीन की जरूरत होती है तो कम से कम 33 प्रतिशत जमीन का उपयोग धूलकण रोकने वाले पौधे लगाने में होना चाहिए। ऐसे स्थिति में स्टोन क्रशर संचालक मनमानी कर रहे हैं, वहीं जिम्मेदार अफसर उनकी कमियों पर पर्दा डालने को फाइलों में सभी मानक ओके दिखा रहे हैं। जबकि हकीकत यह है कि स्टोन क्रशरों की वजह से पूरे इलाके में जमकर प्रदूषण फैल रहा है।

हरित पट्टी विकसित नहीं की गई
स्टोन क्रशर संचालकों ने कहीं भी हरित पट्टी विकसित नहीं की है। कुछ पेड़ लगा दिए हैं। जबकि ऐसे पेड़ लगाने का प्रावधान शर्तों में शामिल है जोकि धूल के कणों को रोक सकें। स्टोन क्रशर के भीतर की सड़कें पक्की बनाने की शर्त है, लेकिन किसी स्टोन क्रशर में पक्की सड़क नहीं है। कभी कभी पानी के छिड़काव करने की औपचारिकता निभाई जा रही है। जबकि यहां से उड़ने वाली धूल के कणों से लोग बीमार हो रहे हैं और फसलों को भी नुकसान हो रहा है।

स्टोन क्रशरों के बीच दूरी की शर्तों का भी उल्लंघन
स्टोन क्रशर स्थापित करने के लिए एक दूसरे के बीच दूरी 400 मीटर से कम नहीं होनी चाहिए। लेकिन पट्टी कलां और घोसीपुरा में सटाकर स्टोन क्रशर खोल लिए गए हैं, जोकि शर्तों का खुला उल्लंघन है। इलाके के लोगों का कहना है कि धूल के कारण रहना मुश्किल है। फसलें भी चौपट होती रहती हैं। कोई भी अधिकारी इनके खिलाफ सुनने को तैयार नहीं हैं।

ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से की स्टोन क्रशर बंद कराने की मांग
पट्टी कलां, घोसीपुरा, बेलवाड़ा, चौहद्दा व चौहद्दी के ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि स्टोन क्रशर किसानों की फसलों को चौपट कर रहे हैं। शर्तों का उल्लंघन करके इन्हें प्रशासन के अफसर चलवा रहे हैं। स्टोन क्रशर एसोसिएशन के पदाधिकारी मंडल स्तर के एक अफसर का नाम लेकर गांव वालों को धमकाते हैं। कहते हैं कि कोई कार्रवाई नहीं होगी। न क्रशर बंद हो सकेंगे। परेशान ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से कोसी नदी में अवैध खनन की वजह बन रहे स्टोन क्रशरों को तत्काल बंद कराने की मांग की है।

स्वार क्षेत्र में 40 स्टोन क्रशर लाइसेंस प्राप्त हैं। अलग अलग विभागों की रिपोर्ट के मुताबिक सभी शर्तों को पूरा कर रहे हैं। अगर किसी गांव के ग्रामीणों को आपत्ति है तो स्टोन क्रशर की फिर जांच करा ली जाएगी। – राजकुमार संगम, खनन अधिकारी।

संबंधित समाचार